57 साल की उम्र में केरल हाईकोर्ट के जज ने पूरा किया आयरनमैन 70.3, 8 घंटे 46 मिनट में तय की 113 KM की दूरी
Yuva India: अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत करने का जुनून हो, तो उम्र और व्यस्तता भी किसी लक्ष्य के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती। इस बात की मिसाल केरल हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस बेचु कुरियन थॉमस ने पेश की है। 57 साल की उम्र में उन्होंने गोवा में आयोजित प्रतिष्ठित ‘आयरनमैन 70.3’ ट्रायथलॉन प्रतियोगिता सफलतापूर्वक पूरी की। उन्होंने तैराकी, साइकिलिंग और दौड़ सहित कुल 113 किलोमीटर की दूरी 8 घंटे, 46 मिनट और 44 सेकंड में तय की।
जस्टिस थॉमस ने पुरुषों की 55 से 59 वर्ष आयु वर्ग में हिस्सा लिया। उनकी इस उपलब्धि को इसलिए भी खास माना जा रहा है, क्योंकि हाईकोर्ट में न्यायिक जिम्मेदारियों और व्यस्त कार्यसूची के बीच उन्होंने कठिन शारीरिक प्रशिक्षण के लिए समय निकाला।
क्या है आयरनमैन 70.3 प्रतियोगिता?
आयरनमैन 70.3 को हाफ आयरनमैन भी कहा जाता है। इसमें 70.3 मील यानी लगभग 113 किलोमीटर की दूरी तीन चरणों में पूरी करनी होती है। प्रतियोगिता में शामिल प्रतिभागियों को लगातार तीन चुनौतीपूर्ण गतिविधियों से गुजरना पड़ता है।
- स्विमिंग: समुद्र या खुले पानी में 1.9 किलोमीटर तैराकी।
- साइकिलिंग: 90 किलोमीटर साइकिल चलाना।
- रनिंग: 21.1 किलोमीटर की हाफ मैराथन दौड़।
इन तीनों चरणों को निर्धारित रेस नियमों के तहत पूरा करना होता है। यह प्रतियोगिता प्रतिभागियों की शारीरिक क्षमता, सहनशक्ति, अनुशासन और मानसिक मजबूती की परीक्षा लेती है। गोवा में आयोजित इस रेस में जस्टिस थॉमस ने तीनों चरण पूरे कर फिनिश लाइन पार की।
बेटे से मिली प्रेरणा, दो साल पहले आया था विचार
जस्टिस बेचु कुरियन थॉमस ने अपनी इस यात्रा के पीछे बेटे को प्रेरणा का स्रोत बताया। उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि करीब दो साल पहले उनके बेटे ने गोवा में आयरनमैन 70.3 प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। बेटे को तैयारी करते और प्रशिक्षण लेते देखकर उनके मन में भी इस चुनौती को पूरा करने का विचार आया।
हालांकि, शुरुआत में उन्हें खुद पर पूरा भरोसा नहीं था कि वे इतनी कठिन प्रतियोगिता पूरी कर पाएंगे। उन्होंने बताया कि वे पहले भी खेलों में रुचि रखते थे, लेकिन न्यायिक जिम्मेदारियों के कारण उनकी शारीरिक गतिविधियां कम हो गई थीं। लंबे समय तक बैठकर काम करने का असर उनकी सेहत पर भी पड़ रहा था। ऐसे में उन्होंने खुद को दोबारा फिट बनाने और इस चुनौती को स्वीकार करने का फैसला किया।
कोर्ट के काम के बीच निकाला ट्रेनिंग का समय
एक हाईकोर्ट जज के लिए नियमित प्रशिक्षण का समय निकालना आसान नहीं था। जस्टिस थॉमस ने बताया कि वे अदालत में भारी कामकाज और रिट याचिकाओं से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इसके बावजूद उन्होंने सुबह जल्दी और देर शाम प्रशिक्षण जारी रखा।
उन्होंने कहा कि काम से समझौता करने के बजाय प्रशिक्षण के लिए अपनी नींद कम की। सामाजिक कार्यक्रमों, भाषणों और उद्घाटन समारोहों में जाना भी सीमित कर दिया, ताकि अभ्यास के लिए ज्यादा समय मिल सके। उन्होंने 21 अप्रैल से नियमित ट्रेनिंग शुरू की थी। शुरुआती दिनों में वे लगातार केवल 50 मीटर तैर पाते थे, लेकिन अभ्यास के साथ धीरे-धीरे उनकी क्षमता बढ़ती गई।
चोटों के बावजूद नहीं छोड़ी तैयारी
इस सफर में उन्हें कई शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनके घुटने में पहले मेनिस्कस से जुड़ी समस्या और सर्जरी का इतिहास रहा है। इसके अलावा वैरिकोज वेन्स और मांसपेशियों में खिंचाव जैसी परेशानियां भी प्रशिक्षण के दौरान सामने आईं।
इसके बावजूद उन्होंने तैयारी जारी रखी। प्रतियोगिता के दिन भी समुद्र में तैराकी, गोवा के ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर साइकिलिंग और अंत में 21.1 किलोमीटर की दौड़ पूरी करना उनके लिए बड़ी चुनौती थी।
युवाओं और कामकाजी लोगों के लिए संदेश
जस्टिस थॉमस की उपलब्धि सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता पूरी करने तक सीमित नहीं है। यह बताती है कि नियमित अभ्यास, लक्ष्य के प्रति समर्पण और अनुशासन से व्यस्त जीवन में भी फिटनेस को जगह दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि व्यस्तता को अक्सर समय न निकाल पाने का बहाना बना लिया जाता है और डर खत्म होने पर ही असली जिंदगी शुरू होती है।
हालांकि, उनकी नींद कम करने की रणनीति को सामान्य सलाह नहीं माना जाना चाहिए। पर्याप्त नींद भी सेहत और खेल प्रदर्शन के लिए जरूरी है। उनकी उपलब्धि का बड़ा संदेश यही है कि उम्र चाहे जो हो, नई चुनौती स्वीकार करने और खुद को बेहतर बनाने की शुरुआत की जा सकती है।
