Yuva India: भारत में धार्मिक जुलूसों में डीजे पर बजने वाले तेज संगीत को लेकर बार-बार सवाल उठ रहे है। हालांकि, आवश्यक दिशा-निर्देश के साथ लाउडस्पीकर और साउंड सिस्टम इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाती है, लेकिन इस बीच डीजे के शोर के कारण स्कूल में पढ़ रही एक छात्रा की मौत का मामला तेजी से वायरल हो रहा है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि लाउड म्यूजिक हमारे स्वास्थ्य पर क्या-क्या और कितना असर डालता है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में गणेश उतस्व के दौरान निकले जुलूस के बीच एक दर्दनाक घटना सामने आई है। आरोप है कि जुलूस में तेज आवाज में डीजे बजने के दौरान दूसरी कक्षा की छात्रा वैष्णवी मिश्रा की तबीयत बिगड़ गई। स्कूल में बेहोश होने के बाद उसकी मैत हो गई।

जानकारी के मुताबिक घटना सोमवार की है। स्कूल के पास से गणेश प्रतिमा विसर्जन का जुलूस निकल रहा था। इस दौरान डीजे पर तेज संगीत बज रहा था। छात्रा के परीवार का आरोप है कि तेज आवाज के कारण उसकी तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद उसे स्कूल में बेहोशी की हालत में पाया गया।
स्कूल में बेहोश हुई छात्रा
बताया गया कि गणेश प्रतिमा विसर्जन के जुलूस के दौरान छात्रा की तबीयत अचानक खराब हुई। स्कूल में वह बेहोश हो गई, जिसके बाद उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार स्कूल और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज की जांच की जा रही है ताकि घटनाक्रम और छात्रा की तबीयत बिगड़ने की परिस्थितियों का पता लगाया जा सके।
तेज आवाज को लेकर परिवार का आरोप
परिवार का आरोप है कि जुलूस में बज रहे तेज संगीत के बाद छात्रा की तबीयत बिगड़ी। हालांकि, पुलिस जांच पूरी होने से पहले तेज आवाज को मौत का निश्चित कारण नहीं माना जा सकता। मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
धार्मिक जुलूसों में तेज आवाज पर फिर सवाल
इस घटना के बाद धार्मिक जुलूसों में लाउडस्पीकर और डीजे के इस्तेमाल तथा ध्वनि की सीमा को लेकर देश में चर्चा फिर तेज हो गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार मुंबई की सार्वजनिक सड़कों पर पटाखे फोड़ने पर रोक लगाने की बात की गई थी। गणेश उत्सव के दौरान धार्मिक आयोजनों में ध्वनि प्रदूषण और सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
फिलहाल, बलरामपुर की इस घटना में पुलिस CCTV फुटेज और अन्य तथ्यों की जांच कर रही है। छात्रा ती मौत की सटीक वजह जांच पुरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
आपको ये भी बता दें कि तेज लाउड में लगातार कोई गाना या शोर शराबा सुनने का हमारी सेहत पर गहरा असर पड़ता है। एक रिपोर्ट के अनुसार लगातार तेज साउंड इंसान के लिए बहरापन, मानसिक तनाव, चिड़चिड़ाहट, तेज सिरदर्द, हाई ब्लड प्रेशर, अनिद्रा, याददाश्त कमजोर होना, ब्रेन हैमरेज, किसी चीज पर फोकस न कर पाना और हार्ट अटैक का कारण बनता है।
लगातार तेज आवाज सुनना हर किसी के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। 185-200 डेसिबल तक की आवाज व्यक्ति की मौत का कारण बन सकती है।
वहीं WHO के अनुसार लाउड म्यूजिक और शोर शराबे में रहने के चलते 12 साल से 35 साल के करीब 100 करोड़ लोगों पर कम सुनने का खतरा बना हुआ है।
