Yuva India: गुजरात सरकार ने राज्य में नए मिडिल और हायर सेकेंडरी स्कूल शुरू करने तथा उनकी मान्यता से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। सरकार ने स्कूल चलाने और शिक्षा देने को ‘कारोबार’ (बिजनेस) की श्रेणी में मानते हुए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति के तहत मंजूरी की शर्तों को काफी आसान बना दिया है। हाल ही में जारी सरकारी अधिसूचना के अनुसार, इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य स्कूल खोलने वालों के रास्ते की अड़चनों और दिक्कतों को कम करना है।
एक ही इलाके में अब खुल सकेंगे कितने भी स्कूल
नए नियमों के तहत अब एक ही क्षेत्र में स्कूलों की संख्या को लेकर कोई पाबंदी नहीं होगी। पहले किसी इलाके में दूसरा स्कूल खोलने की मंजूरी स्थानीय जरूरत और कुछ खास शर्तों से जुड़ी होती थी, लेकिन अब उस शर्त को पूरी तरह हटा दिया गया है। इसके अलावा, नई कक्षा शुरू करने, नई फैकल्टी रखने या विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए आवेदन के समय दिए जाने वाले ‘एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट’ (अनिवार्यता प्रमाण पत्र) की अनिवार्यता को भी खत्म कर दिया गया है।
खेल का मैदान न हो, तो छत को भी माना जा सकेगा मैदान
स्कूल की मान्यता को लेकर खेल के मैदान के नियमों में भी राहत दी गई है:
- यदि स्कूल के पास अपना खेल का मैदान नहीं है, तब भी उसे मान्यता मिल सकेगी।
- स्कूल के मुख्य प्रवेश द्वार से 500 मीटर के दायरे में किसी सुरक्षित मैदान का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके लिए मैदान के मालिक, संस्था या सक्षम प्राधिकृत अधिकारी के साथ कम से कम 15 साल का रजिस्टर्ड किरायानामा या समझौता (एमओयू) होना जरूरी होगा।
- सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सुरक्षा और मौजूदा एफएसआई (FSI) नियमों के अधीन स्कूल बिल्डिंग की छत को भी खेल का मैदान माना जा सकेगा।
400 वर्ग फुट की सीमा खत्म, लेकिन एक कक्षा में अधिकतम 60 छात्र रहेंगे
नए नियमों के अनुसार एक कक्षा में अधिकतम 60 विद्यार्थियों की सीमा पहले की तरह बरकरार रखी गई है। हालांकि, पहले क्लासरूम में बैठने के लिए 400 वर्ग फुट की जगह अनिवार्य होती थी, जिसे अब हटा दिया गया है। अब क्लासरूम का क्षेत्रफल तय मापदंड के बजाय आरटीई (RTE) के प्रावधानों के मुताबिक माना जाएगा, जिसमें बैठने की व्यवस्था और पर्याप्त जगह पर जोर दिया गया है।
