Yuva India: भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स निफ्टी में लगातार आठवें हफ्ते गिरावट का सिलसिला जारी रहा है। 25 सितंबर 2026 को समाप्त सप्ताह में निफ्टी करीब 5.8 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,620 के स्तर पर बंद हुआ। यह वर्ष 2001 के बाद गिरावट का सबसे लंबा दौर बताया जा रहा है।
7 हफ्तों में निफ्टी में 5.8 प्रतिशत की गिरावट
इससे पहले 21 सितंबर 2001 को समाप्त सात हफ्तों के दौरान निफ्टी में 20.5 प्रतिशत की गिरावट आई थी। इसके बाद जुलाई 2008 में 22.1 प्रतिशत और अप्रैल 2020 में करीब 33.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। मौजूदा दौर में 25 सितंबर 2026 तक सात हफ्तों में निफ्टी 5.8 प्रतिशत नीचे आ चुका था।
बुधवार को सेंसेक्स 49 अंक गिरकर 72,480 पर और निफ्टी 96 अंक की गिरावट के साथ 22,620 पर बंद हुआ। इससे पहले 25 सितंबर को समाप्त सप्ताह में निफ्टी 23,140.5 के स्तर पर बंद हुआ था।
निफ्टी के लिए 22,200 का स्तर अहम
निफ्टी के लिए 22,900-23,000 का स्तर महत्वपूर्ण होता है। इसके नीचे जाने पर 22,550 और उसके बाद 22,200 तक गिरावट की संभावना पर नजर रखी जा रही है। एलकेपी सिक्योरिटीज के अनुसार कोविड क्रैश के बाद पहली बार निफ्टी का 200-हफ्ते का मूविंग एवरेज करीब 22,600 के स्तर पर आया है।
बाजार में गिरावट के पीछे ये कारण
विदेशी निवेशकों की बिकवाली: सितंबर में विदेशी फंडों ने करीब 26,000 करोड़ रुपये निकाले हैं। इससे बाजार में नकदी का दबाव बढ़ा है।
ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका: अक्टूबर में रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की आशंका भी बाजार sentiment को प्रभावित कर रही है।
आईपीओ में निवेश: कुछ महीनों से रिकॉर्ड आईपीओ फंडिंग के कारण भी बाजार से नकदी निकल रही है।
कच्चे तेल की कीमतें: कच्चे तेल की कीमत करीब 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने और अमेरिका में बॉन्ड यील्ड के 5 प्रतिशत से ऊपर जाने से भी शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा है।
ब्लॉकबस्टर आईपीओ का रिटर्न भी दबाव में
2021 के बाद 9,500 करोड़ रुपये से बड़े 11 आईपीओ में से 7 का प्रदर्शन इश्यू प्राइस से नीचे रहा है। इन शेयरों में निवेशकों की करीब 1.05 लाख करोड़ रुपये की पूंजी लगी थी, जिसका मौजूदा मूल्य घटकर करीब 88,979 करोड़ रुपये रह गया है।
बाजार में आगे की दिशा के लिए विदेशी निवेश, कच्चे तेल की कीमत, ब्याज दरों और आगामी आईपीओ गतिविधियों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।

