Yuva India: अब मतदाता सूची से फर्जी या मनमाने ढंग से नाम कटवाने के लिए बड़ी संख्या में आवेदन जमा नहीं किए जा सकेंगे। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने फॉर्म-7 (Form-7) के जरिए दर्ज कराई जाने वाली आपत्तियों की अधिकतम संख्या तय कर दी है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बिना किसी ठोस आधार के सामूहिक आपत्तियां दर्ज कराने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना और आम मतदाताओं को अनावश्यक परेशानी से बचाना है।
यह नए निर्देश ऑनलाइन और ऑफलाइन—दोनों माध्यमों से मिलने वाले आवेदनों पर समान रूप से लागू होंगे।
नए नियमों की मुख्य बातें (Key Highlights)
दावा-आपत्ति अवधि में सीमा: मतदाता सूची के पुनरीक्षण (दावा-आपत्ति अवधि) के दौरान एक मतदाता अधिकतम 10 फॉर्म-7 आवेदन जमा कर सकेगा।
सामान्य दिनों में सीमा: साल के सामान्य दिनों (अद्यतन अवधि) में यह सीमा प्रति माह अधिकतम 5 आवेदन होगी।
गलत शिकायत पर कार्रवाई: गलत या फर्जी आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सुनवाई का अधिकार: किसी मतदाता का नाम हटाने का अंतिम फैसला लेने से पहले संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने (सुनवाई) का पूरा अवसर दिया जाएगा।
कौन भर सकता है फॉर्म-7? फॉर्म-7 केवल वही व्यक्ति भर सकता है, जिसका नाम संबंधित विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज हो।
6 नवंबर को प्रकाशित होगी नई मतदाता सूची
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ए. श्रीनिवास और संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजकुमार लोहाना ने आयोग के निर्देशों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नई मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन 6 नवंबर को होगा।
राज्य में पिछली मतदाता सूचियों में कुल 2 करोड़ 6 लाख से अधिक मतदाता दर्ज थे। अब तक करीब 34 लाख ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए जा चुके हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जो संबंधित पते पर मौजूद नहीं हैं।
कैसे होगी जांच और किसे मिलेगा फायदा?
किसे मिलेगा फायदा?
इस नई व्यवस्था से उन निर्दोष मतदाताओं को बड़ी राहत मिलेगी, जिनके नाम हटाने के लिए बिना ठोस आधार के बार-बार झूठी आपत्तियां दर्ज कराई जाती थीं।
जांच प्रक्रिया:
- सत्यापन: निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) आवेदक के विवरण और हस्ताक्षरों की गहनता से जांच करेंगे।
- व्यक्तिगत सत्यापन: यदि कोई व्यक्ति 5 से अधिक मामलों में आपत्ति दर्ज कराता है, तो नियमानुसार उसका व्यक्तिगत सत्यापन (Personal Verification) किया जाएगा।
- सुनवाई: आवश्यकता पड़ने पर मामले की औपचारिक सुनवाई की जाएगी और निष्पक्ष निर्णय लिया जाएगा।
