Yuva India: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC) को संबोधित करते हुए कहा कि विज्ञान की सार्थकता तभी है जब वह प्रयोगशाला (लैब) से निकलकर आम जनता की जमीन तक पहुंचे और लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विज्ञान केवल चर्चा या वाद-विवाद का मंच बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके परिणाम मापने योग्य (measurable outcomes) होने चाहिए।
अनुसंधान और विकास पर विशेष जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की विज्ञान और प्रौद्योगिकी यात्रा लंबे समय तक अन्य देशों की बराबरी करने की रही है, लेकिन 21वीं सदी में भारत वैज्ञानिक और तकनीकी विकास में एक वैश्विक नेता के रूप में उभरा है। उन्होंने भारत की खोज की संस्कृति का जिक्र करते हुए शून्य की खोज, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान की सफल लैंडिंग, पहले ही प्रयास में मंगलयान की सफलता और कोविड-19 महामारी के दौरान स्वदेशी टीकों के विकास को इसके बड़े उदाहरण बताया।
अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्धता
शोध और अनुसंधान को गति देने के लिए सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) को तेजी से आगे बढ़ाने की बात कही। उन्होंने 1 लाख करोड़ रुपये के फंड का हवाला दिया, जिसमें प्रयोगशालाओं से शोध को बाजार तक ले जाने के लिए 12,000 करोड़ रुपये शामिल हैं, जिसमें निजी निवेशकों की भी समान भागीदारी होगी। इसके अलावा, भारत में पेटेंट फाइलिंग की संख्या लगभग 50,000 से बढ़कर 1.5 लाख हो गई है, जो देश में बढ़ते इनोवेशन कल्चर को दर्शाता है।
एआई (AI) और आधुनिक तकनीक का युग
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई रूटीन कामों को तेजी से पूरा कर सकता है और उत्पादकता बढ़ा सकता है, लेकिन यह वैज्ञानिकों की स्वतंत्र सोच और मौलिक विचारों का विकल्प नहीं बन सकता। उन्होंने देश के अंतरिक्ष स्टार्टअप्स, स्वदेशी एआई चिप्स के विकास और भारतीय कच्चे माल पर आधारित बैटरी तकनीक पर चल रहे कार्यों की भी सराहना की।
कार्यक्रम के अंत में परमाणु वैज्ञानिक होमी जे. भाभा की जयंती का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए परमाणु ऊर्जा और आधुनिक तकनीकों का सही तालमेल जरूरी है तथा देश का युवा नेतृत्व इस दिशा में पूरी तरह सक्षम है।
