पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष की किताब में इटली से भारत आने, राजीव गांधी से मुलाकात, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या और राजनीति में आने तक का सफर
Yuva India: कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरुवार, 22 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर अपना डेब्यू किया। अपनी पहली पोस्ट में उन्होंने अपनी बहुप्रतीक्षित आत्मकथा Belonging: A Journey of Love की पहली झलक साझा की। यह किताब 10 नवंबर 2026 को पाठकों के लिए उपलब्ध होने वाली है। उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर कुछ ही घंटों में 1.10 लाख से अधिक फॉलोअर्स हो गए।

सोनिया गांधी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि वह अपनी किताब की पहली झलक साझा करके खुश हैं। उन्होंने इसे प्यार, कर्तव्य, दुख और अपनी जगह तलाशने की कहानी बताया। उनकी आत्मकथा में निजी जीवन के अनुभवों के साथ उन घटनाओं का भी जिक्र है, जिन्होंने उनके जीवन और राजनीतिक सफर को प्रभावित किया।
इटली से भारत तक का सफर बताएंगी सोनिया गांधी
हार्परकॉलिन्स इंडिया द्वारा प्रकाशित होने वाली इस आत्मकथा में सोनिया गांधी के बचपन से लेकर भारत में उनके जीवन तक की कहानी शामिल है। किताब की शुरुआत वर्ष 1965 से होती है, जब सोनिया माइनो इंग्लैंड के कैंब्रिज में पढ़ाई कर रही थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई थी, जो भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाती थे।
सोनिया गांधी वर्ष 1968 में भारत आईं और राजीव गांधी से विवाह के बाद नेहरू-गांधी परिवार का हिस्सा बनीं। किताब में उनकी सास और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से परिचय, भारतीय समाज में ढलने, नई भाषा सीखने और यहां की जीवनशैली अपनाने के अनुभवों का भी उल्लेख है।

परिवार की त्रासदियों का भी होगा जिक्र
आत्मकथा में गांधी परिवार से जुड़ी कई बड़ी त्रासदियों को भी शामिल किया गया है। इनमें वर्ष 1980 में विमान दुर्घटना में संजय गांधी की मौत, 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या और 1991 में चुनाव प्रचार के दौरान राजीव गांधी की हत्या जैसी घटनाएं शामिल हैं।
सोनिया गांधी ने बताया है कि इन घटनाओं ने उनके जीवन को गहराई से प्रभावित किया। वह लंबे समय तक राजनीति से दूर रहना चाहती थीं, लेकिन परिवार पर आए संकट और बाद की परिस्थितियों ने उन्हें सार्वजनिक जीवन की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

राजनीति में आने और प्रधानमंत्री पद ठुकराने की कहानी
किताब में सोनिया गांधी के राजनीतिक सफर का भी विवरण है। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में उनकी लंबी भूमिका और वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करने के उनके फैसले का जिक्र किया गया है।
कांग्रेस के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) की जीत के बाद सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री बनने के बजाय पार्टी और गठबंधन का नेतृत्व करने का निर्णय लिया था। उनकी आत्मकथा में इस फैसले के पीछे की परिस्थितियों और निजी अनुभवों को समझने का अवसर मिल सकता है।
प्रकाशन विवाद के बाद 10 नवंबर को आएगी किताब
सोनिया गांधी की आत्मकथा भारत में प्रकाशन से जुड़े विवाद के कारण भी चर्चा में रही है। पहले पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया इस किताब का प्रकाशन करने वाला था, लेकिन पांडुलिपि में प्रस्तावित संपादकीय बदलावों को लेकर मतभेद सामने आने के बाद प्रकाशन का समझौता आगे नहीं बढ़ा। बाद में हार्परकॉलिन्स इंडिया ने भारतीय संस्करण प्रकाशित करने की घोषणा की।
प्रकाशक ने किताब को प्यार, पहचान, कर्तव्य और अपनेपन की तलाश पर आधारित व्यक्तिगत संस्मरण बताया है। यह पुस्तक पाठकों को सोनिया गांधी के निजी अनुभवों और भारत के राजनीतिक इतिहास से जुड़े उनके नजरिये को समझने का अवसर देगी।
सोनिया गांधी की इंस्टाग्राम पर शुरुआत और आत्मकथा की पहली झलक ने किताब को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। अब पाठकों की नजर 10 नवंबर पर है, जब यह किताब बाजार में आएगी और उनके जीवन के कई अनकहे पहलुओं को विस्तार से पढ़ने का मौका मिलेगा।

