Yuva India: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पर्यावरण नियमों और प्रदूषण नियंत्रण के मानदंडों की अनदेखी करने वाली फैक्ट्रियों, कमर्शियल यूनिट्स और विकास परियोजनाओं पर प्रशासन का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। पर्यावरण से जुड़े मामलों में अंतिम निर्णय लेने और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने 130 से अधिक मामलों को संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (एसपीसीबी) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को ट्रांसफर कर दिया है।
23 अक्टूबर को अपडेट किए गए आधिकारिक दस्तावेजों से यह बड़ा खुलासा हुआ है कि नियमों की अनदेखी करने वाली इन इकाइयों पर जुर्माना लगाने या इनके संचालन पर रोक जैसी कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि साल 2023 और साल 2024 के विभिन्न महीनों के दौरान भी दर्जनों औद्योगिक व व्यावसायिक इकाइयों के केस एसपीसीबी और डीपीसीसी को सौंपे गए थे।
दिल्ली, हरियाणा व यूपी के कई शहर दायरे में
आंकड़ों के मुताबिक, इन मामलों में दिल्ली के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई बड़े जिले प्रमुख रूप से शामिल हैं। इनमें पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद, रोहतक, जींद, गुरुग्राम, बहादुरगढ़, गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, हापुड़, शामली और अलवर जैसे शहर शामिल हैं। इन क्षेत्रों में संचालित होने वाली पेपर मिल, पेट्रोल पंप, हॉट मिक्स प्लांट, रेडी मिक्स कंक्रीट प्लांट, फाउंड्री, प्लास्टिक मिक्स यूनिट्स, टेक्सटाइल और कमर्शियल निर्माण साइटें जांच के दायरे में हैं।
इन मामलों में बवाना औद्योगिक क्षेत्र स्थित जय श्री बालाजी पेपर मार्ट, जींद स्थित एचपीसीएल से जुड़े मामलों से लेकर रोहतक के महादेव कंस्ट्रक्शन कंपनी, सोनीपत के अस्मा बायोमास प्रोडक्ट और राजधानी फाउंड्री जैसे कई नाम शामिल हैं। इसके अलावा पानीपत के एमके इंफ्रा, डिलाइट फ़ैब्रिक्स, ज्योति प्रोसेसर्स और एस डी डाई हाउस जैसी टेक्सटाइल और निर्माण इकाइयां भी इस सूची में हैं। नरेला के प्लास्टिक और इंजीनियरिंग उद्योग तथा नोएडा-गाजियाबाद की रेजिडेंशियल व कमर्शियल प्रॉपर्टीज भी इस लंबी लिस्ट का हिस्सा हैं।
रोहतक में भी कार्रवाई: डेटा कंट्रोल रूम से गायब, चार फैक्ट्रियों को नोटिस
रोहतक में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के आदेशों के बावजूद चिमनियों से निकलने वाले धुएं का रियल टाइम ऑनलाइन डेटा कंट्रोल रूम को न भेजने पर प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने कड़ा रुख अपनाया है। क्षेत्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के नियंत्रक दिनेश कुमार ने बताया कि बोर्ड ने शहर की ऐसी 4 फैक्ट्रियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और सभी से 7 दिनों में जवाब मांगा गया है।
हाल ही में जब कंट्रोल रूम के सर्वर और डेटा फीड का ऑडिट किया गया, तो पता चला कि इन चार फैक्ट्रियों का डेटा लगातार गायब था और डेटा अपडेट भी नहीं किया जा रहा था।
हो सकती है यह बड़ी कार्रवाई
नियमों का उल्लंघन करने वाली इन इकाइयों पर निम्नलिखित सख्त कदम उठाए जा सकते हैं:
- फैक्ट्रियों को सील किया जा सकता है।
- संबंधित विभागों को पत्र लिखकर फैक्ट्रियों के बिजली और पानी के कनेक्शन काटे जा सकते हैं।
- एनजीटी के मानकों के अनुसार भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
