स्नैक्स में अब स्वाद नहीं, ‘टेक्सचर’ का दौर: चॉकलेट में बिस्कुट का क्रंच, चिप्स में एक्स्ट्रा कुरकुरापन बना पसंद
Yuva India: स्नैक्स की दुनिया में अब सिर्फ स्वाद और खुशबू से ग्राहकों को आकर्षित करना काफी नहीं रह गया है। कंपनियां खाने के अनुभव को नया बनाने के लिए टेक्सचर यानी खाने की बनावट पर भी ध्यान दे रही हैं। चॉकलेट में बिस्कुट का कुरकुरापन, चिप्स में एक्स्ट्रा क्रंच और ऐसे स्नैक्स जिनमें एक साथ नरम और कुरकुरी परतें हों, लोगों के बीच आकर्षण बढ़ा रहे हैं। बाजार में इस बदलाव को ‘टेक्सचर ट्रेंड’ कहा जा रहा है।
खाद्य उत्पादों की कंपनियां अब ऐसे स्नैक्स तैयार करने की कोशिश कर रही हैं, जिनमें स्वाद के साथ खाने पर अलग तरह का एहसास भी मिले। इसका असर चॉकलेट, बिस्कुट, कुकीज, चिप्स और दूसरे पैकेज्ड स्नैक्स की नई किस्मों में दिखाई दे रहा है।
कुरकुरेपन की मांग बढ़ी, कंपनियों के सामने चुनौती
रिसर्च फर्म मिंटेल के आंकड़ों में स्नैक्स की बनावट से जुड़ी मांग में तेजी का संकेत मिलता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले दो वर्षों में कुरकुरे और चबाने वाले स्नैक्स की मांग में 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
मिंटेल की अन्य रिपोर्टों में भी टेक्सचर को स्नैक्स और बिस्कुट बाजार में एक अहम प्रतिस्पर्धी पहलू बताया गया है। कंपनियां अब सिर्फ नए फ्लेवर पेश करने के बजाय खाने के दौरान मिलने वाले अनुभव को बेहतर बनाने पर जोर दे रही हैं।
हालांकि, इस तरह के उत्पाद तैयार करना आसान नहीं है। चॉकलेट में बिस्कुट या कुरकुरे टुकड़े मिलाने पर उनकी बनावट बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है। नमी के कारण बिस्कुट नरम पड़ सकता है और चॉकलेट का स्वाद तथा टेक्सचर भी बदल सकता है। इसलिए कंपनियों को सामग्री, पैकेजिंग और बनाने की तकनीक पर विशेष ध्यान देना पड़ता है।
सोशल मीडिया से भी बढ़ रहा आकर्षण
किसी स्नैक को खाते समय आने वाली आवाज भी अब उसके प्रचार का हिस्सा बन गई है। सोशल मीडिया पर चॉकलेट तोड़ने, चिप्स चबाने और कुरकुरी मिठाइयों के वीडियो बड़ी संख्या में देखे जाते हैं। ऐसे वीडियो में खाने की आवाज और उसकी बनावट दर्शकों का ध्यान खींचती है।
इस तरह के कंटेंट से लोगों में नए उत्पादों को आजमाने की उत्सुकता बढ़ सकती है। कंपनियां भी अपने उत्पादों की कुरकुरी परत, चॉकलेट के टूटने की आवाज और अंदर की अलग बनावट को विज्ञापनों में दिखाती हैं। इससे खाने का अनुभव केवल स्वाद तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सुनने और देखने से भी जुड़ जाता है।
ओवरईटिंग से बचने में भी मददगार हो सकता है टेक्सचर
खाने की बनावट का संबंध केवल स्वाद से नहीं, बल्कि खाने की गति और अनुभव से भी हो सकता है। ऑक्सफोर्ड से जुड़े शोधकर्ता चार्ल्स स्पेंस के काम में इस बात पर चर्चा की गई है कि खाने की आवाज और उसे चबाने में लगने वाली मेहनत भोजन के अनुभव को प्रभावित कर सकती है।
कुछ खाद्य पदार्थों को धीरे-धीरे चबाना पड़ता है, जबकि दूसरे पदार्थ आसानी से खाए जा सकते हैं। ऐसे में खाने की बनावट व्यक्ति के खाने के तरीके को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, सिर्फ कुरकुरे स्नैक्स खाने से ओवरईटिंग रुक जाएगी, ऐसा निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। भोजन की मात्रा, पैकेट का आकार और खाने की आदतें भी महत्वपूर्ण हैं।
भारतीय बाजार में भी बढ़ रहा प्रीमियम स्नैक्स का चलन
भारत में बिस्कुट और कुकीज बाजार में भी कंपनियां अलग-अलग स्वाद और बनावट वाले उत्पाद पेश कर रही हैं। मिंटेल की भारतीय बाजार पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार, ग्राहक नए फ्लेवर, बेहतर बनावट और प्रीमियम अनुभव वाले बिस्कुटों में रुचि दिखा रहे हैं। साथ ही, कुछ ग्राहक स्वास्थ्य से जुड़े विकल्प भी चाहते हैं।
ऐसे में कंपनियों के सामने दोहरी चुनौती है। उन्हें एक ओर ग्राहकों को नया और रोमांचक अनुभव देना है, वहीं दूसरी ओर कीमत, गुणवत्ता और स्वास्थ्य से जुड़ी अपेक्षाओं का भी ध्यान रखना है।
कुल मिलाकर, स्नैक्स उद्योग में टेक्सचर एक महत्वपूर्ण ट्रेंड बन रहा है। आने वाले समय में चॉकलेट, बिस्कुट और चिप्स जैसे उत्पादों में अलग-अलग बनावट का मेल देखने को मिल सकता है। कंपनियों के लिए चुनौती यह होगी कि वे कुरकुरेपन और नए अनुभव के साथ उत्पाद की गुणवत्ता और ग्राहकों की जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखें।

