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सुप्रीम कोर्ट सख्त : 2700 की दवा 27 हजार में क्यों ?

Deepkamal Saharan
Last updated: September 23, 2026 2:35 pm
Deepkamal Saharan
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Yuva India : दवाओं की एमआरपी और रिटेलर कीमतों में भारी अंतर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नराजगी जताई है। कोर्ट ने कैंसर की दवा का उदाहरण देते हुए बताया कि जिसका एमआरपी 27 हजार रुपये है, जबकि वहीं दवा रिटेलर के पास 2700 रुपये में उपलब्ध है।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने दवाओं की कीमतों और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई के दौरान यह उदाहरण दिया।

2700 रुपये की दवा 27 हजार में क्यों ?
सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर की दवा की कीमतों का उदाहरण पेश किया। दवा का एमआरपी 27 हजार रुपये बताया गया, जबकि रिटेलर से वही दवा 2,700 रुपये में मिलने की बात सामने आई है।

दवाओं की कीमतों में 10 गुना अंतर पर सवाल
सुनवाई के दौरान दवाओं के एमआरपी और रिटेलर से मिलने वाली कीमतों के बीच बड़े अंतर का मुद्दा उठाया गया। कुछ दवाओं में कीमतों का अंतर काफी अधिक है। अदालत ने दवा की कीमत तय करने की प्रक्रिया, मरीजों के हित और दवा कंपनियों से जुड़े मूल्य निर्धारण के मुद्दों पर ध्यान दिया।

दवाओं की शुरुआती कीमतों पर नियंत्रण क्यों नहीं ?
याचिकाकर्ताओं की ओर से दवाओं की शुरुआती कीमतों पर नियंत्रण की मांग से जुड़े मुद्दे उठाए गए। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि ड्रग्स प्राइसेज कंट्रोल ऑर्डर 2013 के तहत अनुसूची-एक में शामिल दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण है, जबकि 82 फीसदी गैर-अनुसूचित दवाओं की शुरुआती कीमतों पर कोई नियंत्रण नहीं है। कंपनियां शुरुआती कीमत तय करती हैं और उसके बाद सालाना वृद्धि दस फीसदी तक होती है।

मरीज क्या ध्यान रखें ?
मरीज और उनके परिजन दवा खरीदते समय एमआरपी, डॉक्टर की पर्ची और उपलब्ध विकल्पों की जानकारी जांच सकते हैं। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की दवाओं के मामले में डॉक्टर या फार्मासिस्ट से दवा के विकल्प और कीमत से संबंधित जानकारी लेना उपयोगी हो सकता है।

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I’m Deepkamal Saharan, an Indian news editor at YuvaIndia.com. I work on selecting, reviewing, and publishing stories across current affairs, national news, entertainment, technology, and social issues. For me, good journalism is about keeping things simple, clear, and useful for readers. I prefer writing and editing stories in a way that feels easy to understand without losing the important facts. My focus is always on accuracy, readability, and presenting news responsibly.
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