Yuva India: दीवाली और त्योहारों के दौरान आतिशबाजी से हवा में फैला जहरीला धुआं आम लोगों के साथ-साथ कई संवेदनशील वर्ग के लोगों के लिए बेहद खतरनाक और जानलेवा साबित हो सकता है। आतिशबाजी के धुएं में मौजूद सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और जहरीले महीन कण ($PM2.5$ और $PM10$) सांस की नलियों और रक्तप्रवाह में पहुंचकर शरीर को भारी नुकसान पहुंचाते हैं।
किन लोगों को पटाखों के धुएं से सबसे ज्यादा खतरा है?
- अस्थमा और फेफड़ों के मरीज
अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी (COPD) जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए पटाखों का धुआं सबसे ज्यादा नुकसानदेह है। हवा में मौजूद प्रदूषक सांस की नलियों में सूजन और जलन पैदा करते हैं, जिससे सीने में जकड़न, लगातार खांसी और सांस फूलने की समस्या हो सकती है। गंभीर स्थिति में अस्थमा अटैक का खतरा भी बढ़ जाता है।
- गर्भवती महिलाएं
पटाखों के धुएं में लेड, कैडमियम और बेरियम जैसी भारी धातुएं मौजूद होती हैं। जहरीले धुएं के लगातार संपर्क में आने से गर्भस्थ शिशु के विकास पर असर पड़ सकता है।
- नवजात और छोटे बच्चे
छोटे बच्चों के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होते हैं और वे बड़ों की तुलना में तेजी से सांस लेते हैं। इस वजह से प्रदूषण के हानिकारक कण आसानी से उनके श्वसन तंत्र में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे उन्हें गले में खराश, खांसी और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
- दिल के मरीज
धुएं में मौजूद $PM2.5$ कण रक्तचाप को बढ़ा सकते हैं और शरीर में अंदरूनी सूजन पैदा करते हैं। पहले से हृदय रोग से पीड़ित मरीजों के लिए अत्यधिक प्रदूषण से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
- बुजुर्ग
बढ़ती उम्र के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) और फेफड़ों की कार्यक्षमता कम होने लगती है। जहरीले धुएं से बुजुर्गों को सांस लेने में भारी तकलीफ और बेचैनी हो सकती है।
जहरीले धुएं से बचाव के जरूरी उपाय
घर के अंदर रहें: जब आतिशबाजी अधिक हो रही हो, तब घर की खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें।
मास्क का प्रयोग करें: बाहर निकलना अनिवार्य हो तो साधारण कपड़े के स्थान पर N95 या एंटी-पॉल्यूशन मास्क पहनें।
दवाएं और इनहेलर तैयार रखें: सांस या दिल के मरीज अपनी जरूरी दवाएं, इनहेलर या नेबुलाइजर हमेशा पास रखें।
सुबह की वॉक से बचें: हवा में प्रदूषण के कण जमीन के करीब जमे होते हैं, इसलिए सुबह-सुबह टहलने से बचें।
भरपूर पानी पिएं: गुनगुना पानी और काढ़ा पिएं, जिससे शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकलने में मदद मिले।
किसी भी प्रकार की गंभीर बेचैनी, सीने में दर्द या सांस लेने में ज्यादा तकलीफ होने पर तुरंत नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें।
