प्रधानमंत्री ने कहा- 2047 का भारत अधिक शहरी होगा और युवाओं की अपेक्षाएं बढ़ेंगी; परीक्षा प्रक्रिया में समय और खर्च कम करने पर भी दिया जोर
Yuva India : संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकारी सेवाओं और भर्ती प्रक्रिया में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज नागरिक सरकारी सेवाओं के लिए हफ्तों या महीनों तक इंतजार नहीं करना चाहते। ऐसे में सार्वजनिक सेवाओं को ‘इंस्टेंट डिलीवरी’ के दौर के अनुरूप तैयार करना होगा।
बदलती जरूरतों के अनुरूप बदलना होगा सरकारी सेवा मॉडल
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2047 तक भारत अधिक शहरी होगा और खासकर युवाओं की अपेक्षाएं बढ़ेंगी। AI कुछ ही क्षणों में बड़ी संख्या में दस्तावेजों को प्रोसेस कर सकता है और सरकार के पास रियल-टाइम डेटा उपलब्ध है। ऐसे में नागरिकों को तेज और प्रभावी समाधान की उम्मीद होगी।
मोदी ने कहा कि बदलती परिस्थितियों के साथ सिविल सेवाओं में भी आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने की बात कही।
परीक्षा प्रक्रिया में कम हो समय और खर्च
प्रधानमंत्री ने परीक्षा एजेंसियों से परीक्षा चक्र को छोटा करने और ‘टाइम सर्टेनिटी’ के सिद्धांत पर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लंबी परीक्षा प्रक्रिया के कारण अभ्यर्थियों और उनके परिवारों पर कोचिंग फीस, किराया और परिवहन जैसे खर्चों का बोझ बढ़ता है।
उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया में केवल अभ्यर्थी के ज्ञान को परखने के बजाय यह समझने की जरूरत भी बताई कि वह सिविल सेवा में क्यों आना चाहता है। PIB के अनुसार, प्रधानमंत्री ने ‘Nation First’ और ‘Citizen First’ को महत्वपूर्ण कसौटी बताया।
UPSC के 100 साल पूरे
UPSC की स्थापना 1 अक्टूबर 1926 को हुई थी। 2026 में आयोग ने अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे किए। शताब्दी समारोह का आयोजन नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया गया, जहां प्रधानमंत्री ने स्मारक डाक टिकट, विशेष सिक्का और UPSC से संबंधित 100 महत्वपूर्ण फैसलों के संकलन का विमोचन भी किया।

