नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शुक्रवार को नई दिल्ली में अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। भारत मंडपम में हुई इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, परमाणु सहयोग, उद्योग, रोजगार और वैश्विक परिस्थितियों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की।
बैठक के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को अगले भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का निमंत्रण दिया, जिसे प्रधानमंत्री ने स्वीकार कर लिया। दोनों नेताओं के बीच यूक्रेन संघर्ष पर भी बातचीत हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर कहा कि भारत बातचीत और कूटनीति के जरिए विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थक है।
मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को तमिल साहित्य के प्रसिद्ध ग्रंथ तिरुक्कुरल का रूसी भाषा में अनुवादित संस्करण भी भेंट किया।
रूस जाएंगे प्रधानमंत्री मोदी
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूस आने का निमंत्रण दिया है। प्रधानमंत्री ने इसे स्वीकार कर लिया।
हालांकि यात्रा की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। दोनों पक्ष आपसी सहमति के आधार पर राजनयिक माध्यमों से इसकी तारीख तय करेंगे।
भारत और रूस के बीच वार्षिक शिखर सम्मेलन दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इसमें द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा के साथ आने वाले वर्षों की प्राथमिकताओं पर भी चर्चा होती है।
यूक्रेन युद्ध पर भारत का क्या रुख रहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक में यूक्रेन संघर्ष को लेकर भारत का पुराना रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि किसी भी संघर्ष का स्थायी समाधान बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए ही निकाला जा सकता है।
भारत ने इस दिशा में होने वाले शांति प्रयासों में सहयोग की इच्छा भी जताई।
दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र की परिस्थितियों पर भी विचार-विमर्श हुआ। इन क्षेत्रों में जारी तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और जहाजरानी पर पड़ा है। भारतीय नाविकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा रहे।
भारत-रूस व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य
आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करना मोदी-पुतिन बैठक के प्रमुख विषयों में शामिल रहा।
दोनों देश वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। इसके लिए केवल ऊर्जा कारोबार पर निर्भर रहने के बजाय औद्योगिक उत्पादन, परिवहन, स्टील, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
रूसी बाजार में भारतीय सामान की पहुंच बढ़ाना भी भारत की प्राथमिकताओं में शामिल है। इससे व्यापार संतुलन बेहतर करने और भारतीय कंपनियों के लिए नए बाजार तैयार करने में मदद मिल सकती है।
INNOPROM India पर भी रहा जोर
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने भारत में आयोजित INNOPROM India प्रदर्शनी का भी दौरा किया और इसमें हिस्सा लेने वाली कंपनियों तथा प्रतिनिधियों से बातचीत की।
इस आयोजन का उद्देश्य भारतीय और रूसी कंपनियों के बीच औद्योगिक सहयोग बढ़ाना और नई कारोबारी साझेदारियों के लिए मंच उपलब्ध कराना है।
दोनों देशों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से सरकारों के बीच संबंधों के साथ-साथ निजी कंपनियों और उद्योग जगत के बीच भी सीधे संपर्क बढ़ सकते हैं।
रेलवे, सुरंग और स्टील सेक्टर में सहयोग बढ़ाने की तैयारी
बैठक में बुनियादी ढांचे और भारी उद्योग से जुड़े क्षेत्रों पर भी चर्चा हुई।
रेलवे क्षेत्र में सहयोग, सुरंग निर्माण से जुड़ी तकनीक और स्टील उद्योग की पूरी वैल्यू चेन विकसित करने जैसे विषयों पर दोनों देशों ने साथ काम करने की संभावनाएं तलाशीं।
इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से भारतीय और रूसी कंपनियों के बीच तकनीकी साझेदारी तथा निवेश के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी
भारत और रूस के बीच नागरिक परमाणु ऊर्जा पहले से ही सहयोग का महत्वपूर्ण क्षेत्र है। दोनों नेताओं ने इस साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।
इसमें परमाणु ईंधन की आपूर्ति से लेकर बिजली संयंत्रों के पूरे जीवनचक्र से संबंधित तकनीकी और परिचालन सहयोग तक के विषय शामिल हैं।
भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के बीच परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है, जबकि रूस इस क्षेत्र में भारत के पुराने सहयोगियों में शामिल है।
रूस में भारतीय कुशल कामगारों के लिए बढ़ सकते हैं अवसर
मोदी-पुतिन बैठक में रोजगार और लोगों की आवाजाही से जुड़े मुद्दों को भी महत्व मिला।
रूस में कई क्षेत्रों में कुशल श्रमिकों की मांग को देखते हुए भारतीय पेशेवरों और कामगारों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर चर्चा हुई।
यदि इस दिशा में ठोस व्यवस्था बनती है तो दोनों देशों के आर्थिक संबंध बड़े सरकारी समझौतों और कंपनियों तक सीमित न रहकर आम लोगों के स्तर पर भी मजबूत हो सकते हैं।
इसके साथ वीजा, श्रमिकों की आवाजाही और कौशल से जुड़े नियमों को आसान बनाने की संभावनाओं पर भी आगे बातचीत हो सकती है।
पुतिन को मोदी ने भेंट किया तिरुक्कुरल
द्विपक्षीय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किया।
तिरुक्कुरल तमिल साहित्य के सबसे प्रसिद्ध और सम्मानित ग्रंथों में से एक है। इसे संत तिरुवल्लुवर की रचना माना जाता है। करीब दो हजार वर्ष पुराने इस ग्रंथ में व्यक्तिगत जीवन, नैतिकता, शासन, मित्रता, परिश्रम और मानव व्यवहार से जुड़े विचार प्रस्तुत किए गए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने इसे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया।
क्या सिखाता है तिरुक्कुरल?
तिरुक्कुरल की शिक्षाएं किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं हैं। इसकी कई बातें आज के जीवन में भी प्रासंगिक मानी जाती हैं।
- व्यक्ति को कटु भाषा से बचते हुए विनम्र और हितकारी शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए।
- केवल भाग्य पर निर्भर रहने के बजाय मेहनत और लगातार प्रयास को महत्व दिया गया है।
- जीवों के प्रति दया और अहिंसा को उच्च मानवीय गुण माना गया है।
- अच्छे मित्र की पहचान कठिन समय में होती है, जबकि गलत संगति से बचने की सीख दी गई है।
- शासक के लिए न्याय, निष्पक्षता और जनता की सुरक्षा को जरूरी बताया गया है।
- दूसरों से मिले सहयोग और उपकार को याद रखना अच्छे चरित्र का हिस्सा माना गया है।
मोदी-पुतिन बैठक के प्रमुख मुद्दे
दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में कई ऐसे विषय सामने आए जो आने वाले वर्षों में भारत-रूस संबंधों की दिशा तय कर सकते हैं।
इनमें प्रमुख हैं:
- 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना।
- भारत और रूस की कंपनियों के बीच औद्योगिक सहयोग बढ़ाना।
- भारतीय वस्तुओं की रूसी बाजार में पहुंच बेहतर करना।
- रेलवे और सुरंग निर्माण में तकनीकी सहयोग।
- स्टील सेक्टर में पूरी वैल्यू चेन विकसित करना।
- नागरिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी को आगे बढ़ाना।
- दोनों देशों के बीच निवेश के नए अवसर तैयार करना।
- रूस में भारतीय कुशल कामगारों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना।
- अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के बीच समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर समन्वय बढ़ाना।
ब्रिक्स सम्मेलन से पहले मुलाकात क्यों है महत्वपूर्ण?
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।
नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के नेता वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन और महत्वपूर्ण सप्लाई चेन को मजबूत करने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।
ऐसे में मोदी और पुतिन के बीच हुई बैठक केवल भारत-रूस संबंधों तक सीमित नहीं मानी जा रही। यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव, ऊर्जा बाजार और बदलती वैश्विक व्यवस्था के बीच दोनों नेताओं की बातचीत का कूटनीतिक महत्व भी है।
भारत की कोशिश एक तरफ रूस के साथ अपने पुराने रणनीतिक संबंधों को मजबूत बनाए रखने की है, वहीं दूसरी तरफ वह बातचीत और कूटनीति के जरिए अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के समाधान की अपनी नीति को भी आगे बढ़ा रहा है।
अगला भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन अब दोनों देशों के संबंधों का अगला अहम पड़ाव होगा। प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित रूस यात्रा के दौरान व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, तकनीक और औद्योगिक सहयोग से जुड़े कई मुद्दों पर आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है।

