Yuva India: दक्षिण-पश्चिम (Monsoon) की 15 अक्टूबर तक देश से विदाई के साथ ही अब उत्तर-पूर्वी यानी ‘विंटर मानसून’ (Winter Monsoon) का इंतजार शुरू हो चुका है। तटीय आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में पूर्वी हवाओं के सक्रिय होने के साथ ही 20 अक्टूबर के आसपास इसकी शुरुआत होने की पूरी संभावना है।
मौसम विभाग के अनुसार, इस बार विंटर मानसून 20 अक्टूबर से 8 नवंबर के बीच दस्तक दे सकता है। इसका असर दशहरे से लेकर दीपावली तक पूरे देश में देखने को मिलेगा।
कहां कैसा रहेगा मौसम?
दक्षिण भारत: उत्तर-पूर्वी मानसून के प्रभाव से तमिलनाडु और तटीय आंध्र प्रदेश सहित दक्षिण भारत के कई राज्यों में झमाझम बारिश होगी।
उत्तर भारत: उत्तर-पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के चलते पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक बौछारें पड़ने और ठंड की शुरुआत होने के आसार हैं।
अल-नीनो का नहीं पड़ेगा प्रतिकूल असर
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस साल अल-नीनो (El Niño) सक्रिय है, लेकिन उत्तर-पूर्वी मानसून पर इसका कोई बुरा या प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। अक्टूबर से दिसंबर के दौरान बंगाल की खाड़ी में बनने वाले मौसमी सिस्टम पूर्वी तटीय इलाकों में भारी बारिश लाते हैं।
तमिलनाडु के लिए क्यों खास है विंटर मानसून?
48% बारिश का स्रोत: तमिलनाडु को अपनी पूरे साल की कुल बारिश का लगभग 48% हिस्सा अक्टूबर से दिसंबर के बीच इसी विंटर मानसून से प्राप्त होता है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून से कम बारिश: जून से सितंबर वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून से राज्य को केवल 30% से 35% बारिश ही मिल पाती है।
सामान्य बारिश का पैमाना: विंटर मानसून के दौरान दीर्घकालिक औसत (LPA) की 88% से 112% बारिश को ‘सामान्य’ श्रेणी में माना जाता है।
महत्व: यह मानसून दक्षिण भारत में खेती और पेयजल के जलाशयों को भरने के लिए बेहद जीवनदायक माना जाता है।

