चुनाव आयोग ने SIR सॉफ्टवेयर की जानकारी RTI में देने से किया इनकार, कहा- सुरक्षा और निष्पक्षता से जुड़ा मामला
Yuva India: चुनाव आयोग (ECI) ने बिहार में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) अभियान में इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर की जानकारी सूचना के अधिकार (RTI) के तहत देने से इनकार कर दिया है। आयोग का कहना है कि यह सॉफ्टवेयर मतदाता सूची में त्रुटियों की पहचान और सुधार से जुड़ा है तथा इसकी तकनीकी जानकारी सार्वजनिक करने से चुनाव प्रक्रिया की सुरक्षा और निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
यह मामला तब सामने आया जब एक आरटीआई आवेदन में पूछा गया कि SIR के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां पकड़ने के लिए कौन-सा सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किया गया, उसे किसने विकसित किया और क्या उसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग किया गया था। आयोग ने इन सवालों के जवाब देने से इनकार करते हुए संबंधित कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया।
किसने मांगी थी जानकारी ?
तेलंगाना निवासी एम.ए. मुजीब अय्यूब ने आरटीआई दाखिल कर चुनाव आयोग से कई तकनीकी जानकारियां मांगी थीं। उन्होंने जानना चाहा था कि मतदाता सूची में त्रुटियां, दोहराव या अन्य विसंगतियों की पहचान के लिए कौन-सा सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किया गया और क्या इस प्रक्रिया में AI आधारित टूल्स का उपयोग हुआ।
आवेदन में यह भी पूछा गया था कि सॉफ्टवेयर किस कंपनी या एजेंसी ने तैयार किया, उसका स्वामित्व किसके पास है और उसके काम करने का तरीका क्या है।
चुनाव आयोग ने क्या कहा ?
चुनाव आयोग ने जवाब में कहा कि यह जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम की कुछ धाराओं के तहत सार्वजनिक नहीं की जा सकती। आयोग के अनुसार, SIR में इस्तेमाल होने वाले तकनीकी सिस्टम और प्रक्रियाओं का खुलासा करने से चुनावी व्यवस्था की सुरक्षा, डेटा की गोपनीयता और भविष्य की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है।
आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR अभ्यास के दौरान इस्तेमाल होने वाले सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म और आईटी सिस्टम सुरक्षा मानकों के तहत संचालित किए जाते हैं। इसलिए उनके तकनीकी विवरण साझा करना उचित नहीं माना गया।
किन धाराओं का दिया हवाला ?
चुनाव आयोग ने RTI अधिनियम की धारा 8(1)(a) और धारा 8(1)(g) का हवाला देते हुए जानकारी देने से इनकार किया। आयोग का कहना है कि इन प्रावधानों के तहत ऐसी सूचनाओं को सार्वजनिक करने से छूट मिलती है, जिनसे राज्य की सुरक्षा, रणनीतिक हित या किसी व्यक्ति की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
आयोग ने यह भी कहा कि चुनावी प्रक्रियाओं की अखंडता बनाए रखना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है और तकनीकी प्रणाली से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा करना इस जिम्मेदारी के अनुरूप नहीं होगा।
RTI आवेदक ने जताई आपत्ति
आरटीआई आवेदक एम.ए. मुजीब अय्यूब ने आयोग के जवाब पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने केवल सॉफ्टवेयर और उसकी कार्यप्रणाली से जुड़ी जानकारी मांगी थी, न कि मतदाताओं के निजी डेटा की।
उनका कहना है कि यदि AI आधारित प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है, तो उसके बारे में पारदर्शिता होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मतदाता सूची में संशोधन किस प्रक्रिया के तहत किए गए।
बिहार SIR पर पहले से चल रही है बहस
बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान पहले से ही चर्चा का विषय बना हुआ है। इस अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और त्रुटियों को दूर करना बताया गया है।
हालांकि, विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं चुनाव आयोग लगातार यह कहता रहा है कि पूरी प्रक्रिया कानून और निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है।
आगे क्या हो सकता है ?
यह मामला अब पारदर्शिता और चुनावी सुरक्षा के बीच संतुलन की बहस को और तेज कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल चुनावी प्रक्रियाओं में तकनीक की भूमिका बढ़ने के साथ-साथ जवाबदेही और गोपनीयता दोनों महत्वपूर्ण मुद्दे बन गए हैं।
फिलहाल चुनाव आयोग अपने फैसले पर कायम है और उसने SIR सॉफ्टवेयर से जुड़ी तकनीकी जानकारी सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है। यदि आवेदक आयोग के जवाब से संतुष्ट नहीं होता है, तो वह RTI कानून के तहत आगे की अपील की प्रक्रिया अपना सकता है।

