मनोवैज्ञानिकों का दावा- कामयाबी मिलने के बाद जोखिम लेने की इच्छा घटती है, समृद्धि के साथ सुरक्षित विकल्प चुनने की प्रवृत्ति बढ़ी
Yuva India: जिंदगी में सफलता हासिल करने के बाद लोग अक्सर अपने फैसलों को लेकर अधिक सतर्क हो जाते हैं। वे ऐसे विकल्पों को प्राथमिकता देने लगते हैं, जिनमें नुकसान की आशंका कम हो और भविष्य अपेक्षाकृत सुरक्षित रहे। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, आर्थिक समृद्धि और सुरक्षित जीवन की चाह लोगों को जोखिम भरे कामों से दूर कर सकती है। इसका असर नए विचारों को अपनाने, रचनात्मक प्रयोग करने और परंपरागत रास्तों से अलग निर्णय लेने की प्रवृत्ति पर भी पड़ सकता है।
अमेरिकी मनोवैज्ञानिक एडम मास्ट्रोयानी का तर्क है कि आजकल लोग जोखिम कम लेने लगे हैं। इससे उनकी जिंदगी अधिक सुरक्षित हो सकती है, लेकिन नए विचारों और रचनात्मक प्रयोगों की गुंजाइश भी सीमित हो सकती है। रिपोर्ट में इस बदलाव को समझने के लिए किशोरों के व्यवहार, आर्थिक स्थिति और समय के साथ बदलती सामाजिक प्रवृत्तियों का हवाला दिया गया है।
अनिश्चित फायदे के बजाय निश्चित लाभ को प्राथमिकता
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि लोग कई बार ऐसे विकल्प चुनते हैं, जिनसे मिलने वाला लाभ पहले से स्पष्ट हो। इसके मुकाबले अनिश्चित परिणाम वाले विकल्पों को अपनाने से वे बचते हैं। इसे समझने के लिए ‘प्रॉस्पेक्ट थ्योरी’ का भी उल्लेख किया गया है। इस सिद्धांत के अनुसार, लोग संभावित लाभ और नुकसान का आकलन करते समय हमेशा पूरी तरह तर्कसंगत निर्णय नहीं लेते। कई परिस्थितियों में नुकसान का डर संभावित लाभ की उम्मीद पर भारी पड़ जाता है।
जब व्यक्ति के पास पहले से अच्छी आय, स्थिर नौकरी और आरामदायक जीवन होता है, तो वह अपने मौजूदा हालात को जोखिम में डालने से बच सकता है। ऐसे में नए करियर, नए कारोबार या अपरिचित गतिविधियों को आजमाने की इच्छा कम हो सकती है। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर सफल या समृद्ध व्यक्ति जोखिम लेने से पीछे हटे।
किशोरों के व्यवहार में भी दिख रहा बदलाव
मनोवैज्ञानिक जीन ट्वेंगी और हीजुंग पार्क के एक अध्ययन का उल्लेख किया गया है। उन्होंने वर्ष 1976 से 2016 के बीच 13 से 19 साल की उम्र की अमेरिकी किशोरियों से जुड़े सात सर्वेक्षणों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। रिपोर्ट के अनुसार, अधिक आय और लंबी जीवन प्रत्याशा वाले छोटे परिवारों के किशोरों ने नौकरी, ड्राइविंग और बड़ों की निगरानी के बिना बाहर जाने जैसी गतिविधियों को अपेक्षाकृत देर से अपनाया।
इस बदलाव से संकेत मिलता है कि सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां युवाओं के फैसलों तथा स्वतंत्र गतिविधियों को अपनाने की उम्र पर असर डाल सकती हैं। हालांकि, केवल समृद्धि को इसका एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता। परिवार का माहौल, सुरक्षा संबंधी चिंताएं, तकनीक और सामाजिक मान्यताएं भी इसमें भूमिका निभा सकती हैं।
जोखिम भरे कामों से दूरी और मानसिक स्वास्थ्य
एक अन्य अध्ययन का हवाला देते हुए बताया गया है कि 2013 से 2023 के बीच अमेरिका में हाईस्कूल के विद्यार्थियों के बीच ई-सिगरेट के इस्तेमाल में कमी दर्ज की गई। इसे जोखिम भरे व्यवहार से दूरी के सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, किसी एक गतिविधि में कमी आने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि युवा हर तरह के जोखिम से बचने लगे हैं।
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसमें कहा गया है कि सुरक्षित व्यवहार का अर्थ हमेशा बेहतर जीवन या बेहतर मानसिक स्थिति नहीं होता। यदि लोग नुकसान के डर से नए अनुभवों, सामाजिक गतिविधियों और रचनात्मक अवसरों से लगातार दूरी बनाने लगें, तो उनके जीवन के अनुभव सीमित हो सकते हैं।
मनोरंजन और संस्कृति में भी दिखा बदलाव
फिल्मों के उदाहरण से भी बदलती प्रवृत्ति को समझाया गया है। इसके मुताबिक, वर्ष 2000 से पहले अधिक कमाई करने वाली फिल्मों में सीक्वल, प्रीक्वल या स्पिनऑफ की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत थी, जो बाद के दौर में बढ़कर करीब 75 प्रतिशत हो गई। इसे मनोरंजन उद्योग में पहले से पहचानी जाने वाली कहानियों और सफल फ्रेंचाइजी पर बढ़ते भरोसे के उदाहरण के तौर पर पेश किया गया है।
हालांकि, फिल्मों के कारोबार में निवेश, दर्शकों की पसंद और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे दूसरे कारण भी अहम हैं। इसलिए इस बदलाव को केवल जोखिम से बचने की प्रवृत्ति से जोड़ना उचित नहीं होगा।
सफलता के साथ संतुलन भी जरूरी
कुल मिलाकर, रिपोर्ट का मुख्य संदेश यह है कि सुरक्षा और स्थिरता की चाह स्वाभाविक है, लेकिन नुकसान की आशंका के कारण हर नए अवसर से दूरी बनाना व्यक्ति की संभावनाओं को सीमित कर सकता है। करियर, शिक्षा, कारोबार और रचनात्मक कार्यों में सोच-समझकर जोखिम लेना कई बार नए अवसर खोल सकता है।
विशेषज्ञों के विचारों से यह भी समझ आता है कि जोखिम लेने का अर्थ बिना सोचे-समझे फैसला करना नहीं है। बेहतर तरीका यह है कि संभावित फायदे और नुकसान का आकलन किया जाए, जरूरी तैयारी की जाए और फिर निर्णय लिया जाए। इस तरह व्यक्ति सुरक्षा बनाए रखते हुए नए अनुभवों और संभावनाओं के लिए भी जगह बना सकता है।

