गुजरात के 10 गैर-मान्यता प्राप्त दलों को 5 हजार करोड़ से ज्यादा चंदा, 40 मान्यता प्राप्त पार्टियों से भी आगे
Yuva India: देश की राजनीति में चुनावी चंदे और राजनीतिक दलों की फंडिंग को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। गैर-सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और चुनावी आंकड़ों के विश्लेषण में सामने आया है कि गुजरात के कई गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को पिछले पांच वर्षों में हजारों करोड़ रुपये का चंदा मिला। 2020-21 से 2024-25 के बीच 10 गैर-मान्यता प्राप्त दलों को मिला चंदा कई मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की तुलना में कहीं अधिक रहा।
इन 10 दलों को 5,040 करोड़ रुपये से अधिक का चंदा मिला। इसमें 20 हजार रुपये से ज्यादा के चंदे का बड़ा हिस्सा शामिल है। इस राशि का करीब 90 प्रतिशत यानी 4,525 करोड़ रुपये गुजरात के सात दलों को मिला। यह आंकड़ा इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि इन दलों की चुनावी सक्रियता और उन्हें मिले चंदे के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।
गुजरात के दलों को मिला सबसे ज्यादा चंदा
ADR की रिपोर्ट में भी गुजरात के गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की आर्थिक स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान सबसे अधिक आय और चंदा घोषित करने वाले दलों में गुजरात के कई दल शामिल रहे। रिपोर्ट के अनुसार, छह गुजरात आधारित दलों के पास इस अवधि में कुल घोषित आय का बड़ा हिस्सा केंद्रित रहा।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में गुजरात के 29 गैर-मान्यता प्राप्त दलों ने कुल 510.42 करोड़ रुपये की आय घोषित की। यह देशभर में रिपोर्ट जमा कराने वाले 734 दलों की कुल घोषित आय 1,118.49 करोड़ रुपये का लगभग 45.6 प्रतिशत है। इस मामले में गुजरात पहले स्थान पर रहा। इसके बाद दिल्ली के 73 दलों ने 218.48 करोड़ रुपये और राजस्थान के 23 दलों ने 173.37 करोड़ रुपये की आय घोषित की।
80 दलों में से केवल 29 ने दिया पूरा हिसाब
गुजरात में कुल 80 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल बताए गए हैं। इनमें से वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए केवल 29 दलों के ऑडिट और चंदे से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। बाकी दलों के वित्तीय रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं थे।
ADR के मुताबिक, देशभर में चुनाव आयोग की सूची में लगभग 2,074 गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल दर्ज हैं। इनमें से 1,330 दलों के ऑडिट और चंदे की दोनों रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं थीं। यानी करीब 65 प्रतिशत दलों के वित्तीय विवरण का पता सार्वजनिक रूप से नहीं चल पाया।
734 दलों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इनमें से केवल 461 दलों ने ऑडिट और चंदे की दोनों रिपोर्ट जमा की थीं। 159 दलों की केवल ऑडिट रिपोर्ट और 114 दलों की केवल चंदे की रिपोर्ट उपलब्ध थी।
करोड़ों का चंदा मिला, लेकिन चुनाव में नहीं मिली बड़ी सफलता
ADR की रिपोर्ट में राजनीतिक दलों को मिले चंदे और उनके चुनावी प्रदर्शन के बीच भी बड़ा अंतर सामने आया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में एक करोड़ रुपये से अधिक आय घोषित करने वाले 49 दलों में से 43 दल कोई भी सीट जीतने में सफल नहीं हुए। इन दलों को एक करोड़ रुपये से अधिक का चंदा मिला था, लेकिन चुनावी नतीजों में उन्हें सफलता नहीं मिली।
2024-25 में सबसे ज्यादा 20 हजार रुपये से अधिक का चंदा घोषित करने वालों में गुजरात की न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी सबसे आगे रही। पार्टी ने 270.99 करोड़ रुपये से अधिक का चंदा घोषित किया। इसके बाद स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी ने 228.80 करोड़ रुपये और भारतीय गरीब विकास कल्याण पार्टी ने करीब 170 करोड़ रुपये का चंदा घोषित किया।
राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता पर उठे सवाल
ADR ने अपनी रिपोर्ट में गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की वित्तीय जानकारी सार्वजनिक न होने पर चिंता जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, केवल 22.49 प्रतिशत दलों की दोनों जरूरी रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थीं। इससे राजनीतिक फंडिंग की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठते हैं।
गैर-मान्यता प्राप्त दल वे पंजीकृत राजनीतिक संगठन होते हैं, जिन्हें चुनाव आयोग की ओर से राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय मान्यता नहीं मिली होती। ऐसे दल चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन उन्हें मान्यता प्राप्त दलों जैसी कुछ सुविधाएं और विशेष चुनाव चिह्न नहीं मिलते।
ADR की रिपोर्ट ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे, उनके खर्च और चुनावी प्रदर्शन की जानकारी आम जनता के लिए पारदर्शी तरीके से उपलब्ध होनी चाहिए।
