भारत में 12 साल में गरीबी 27.1% से घटकर 2.6% पर आई, 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर; अच्छी नौकरी और आय अब भी चुनौती
Yuva India: भारत में पिछले 12 वर्षों के दौरान अत्यधिक गरीबी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की ‘Poverty and Equity Brief’ रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 2011-12 में 27.1 प्रतिशत आबादी अत्यधिक गरीबी में रह रही थी, जो 2023-24 तक घटकर 2.6 प्रतिशत रह गई। इस अवधि में अनुमानित 49.6 करोड़ लोग गरीबी के दायरे से बाहर आए। विश्व बैंक ने भारत की इस प्रगति को दुनिया में गरीबी घटने की सबसे तेज रफ्तार वाले उदाहरणों में शामिल किया है।
हालांकि, रिपोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि गरीबी कम होने के बावजूद लोगों की कमाई और रोजगार की गुणवत्ता बड़ी चुनौती बनी हुई है। काम करने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है, लेकिन अच्छी नौकरी, बेहतर वेतन और स्थिर आय के अवसरों में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
57.7% से घटकर 16.1% रह गई गरीबी
विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में गरीबी मापने के लिए अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मानकों का इस्तेमाल किया है। 3 डॉलर प्रतिदिन (2021 PPP के आधार पर) से कम पर गुजारा करने वाली आबादी को अत्यधिक गरीब माना गया है। इस श्रेणी में भारत की गरीबी दर 2011-12 के 27.1 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 2.6 प्रतिशत हो गई।
वहीं, निम्न-मध्यम आय वाले देशों के लिए तय 4.20 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी सीमा के आधार पर भारत में गरीबी दर 57.7 प्रतिशत से घटकर 16.1 प्रतिशत रह गई। इस मानक के अनुसार, करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए।
इसका मतलब है कि देश में अत्यधिक गरीबी में रहने वाले लोगों की संख्या में बड़ी कमी आई है, लेकिन व्यापक आर्थिक गरीबी की चुनौती अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
रोजगार बढ़ा, लेकिन कमाई में नहीं हुआ उतना सुधार
2017 से 2023 के बीच भारत की कामकाजी आबादी में करीब 13.4 करोड़ लोगों की वृद्धि हुई। रोजगार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना भी इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के कामकाज में शामिल होने से परिवारों की आय में योगदान बढ़ा।
इसके बावजूद नौकरी की गुणवत्ता और वेतन में सुधार की जरूरत बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में सबसे ज्यादा कमाई करने वाले शीर्ष 10 प्रतिशत कामगारों की औसत आय, सबसे कम कमाई करने वाले निचले 10 प्रतिशत कामगारों से करीब 13 गुना अधिक थी। इससे साफ है कि रोजगार के अवसर बढ़ने के बावजूद कमाई का अंतर काफी बड़ा बना हुआ है।
गांवों में अब भी ज्यादा गरीबी
भारत में गरीबी का बोझ ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक है। 2023 में ग्रामीण गरीबी दर 19.3 प्रतिशत थी, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 8.6 प्रतिशत रही। यानी गांवों में रहने वाले लोगों के सामने गरीबी और स्थिर आय से जुड़ी चुनौतियां ज्यादा हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक फैले राज्यों के क्षेत्र में देश के करीब 57 प्रतिशत गरीब लोग रहते हैं। इनमें ऐसे परिवारों की संख्या अधिक है, जहां शिक्षा का स्तर कम है, संपत्ति सीमित है और स्थायी रोजगार तक पहुंच मुश्किल है।
2028 तक गरीबी और घटने का अनुमान
विश्व बैंक ने अनुमान जताया है कि 4.20 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी सीमा के आधार पर भारत की गरीबी दर 2026 में 14.2 प्रतिशत से घटकर 2028 तक 12.1 प्रतिशत हो सकती है। हालांकि, गरीबी घटने की रफ्तार पहले की तुलना में धीमी रहने की संभावना है। यह अनुमान आर्थिक परिस्थितियों, रोजगार और श्रम बाजार से जुड़े आंकड़ों में बदलाव के साथ संशोधित हो सकता है।
रिपोर्ट में गरीबी घटने के पीछे मजबूत घरेलू खपत, रोजगार में वृद्धि, विशेष रूप से महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और सरकारी खाद्य सहायता जैसी सामाजिक कल्याण योजनाओं को प्रमुख वजह बताया गया है।
गरीबी कम हुई, लेकिन आगे की चुनौती बड़ी
भारत में गरीबी घटने के आंकड़े आर्थिक और सामाजिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति दिखाते हैं। बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच बढ़ने से भी लोगों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है। लेकिन केवल गरीबी रेखा से ऊपर आना पर्याप्त नहीं है। परिवारों की आय में स्थिरता, युवाओं के लिए बेहतर रोजगार, महिलाओं के लिए काम के अवसर और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक विकास को मजबूत करना भी जरूरी है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट का संदेश साफ है कि भारत ने गरीबी कम करने में बड़ी उपलब्धि हासिल की है, लेकिन इस प्रगति को टिकाऊ बनाने के लिए अच्छी नौकरियों और बेहतर आमदनी पर ध्यान देना होगा।
