दिल्ली में नेताओं, छात्र कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को हिरासत में लेने पर जताई नाराजगी; रिहाई नहीं होने पर भूख हड़ताल या पदयात्रा की चेतावनी
Yuva India: जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने पर केंद्र सरकार की आलोचना की है। उन्होंने देश में ‘अघोषित इमरजेंसी’ जैसे हालात होने की बात कहते हुए हिरासत में लिए गए लोगों की जल्द रिहाई की मांग की। वांगचुक ने चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शनकारियों को रिहा नहीं किया गया, तो वह खुद शांतिपूर्ण विरोध का रास्ता अपना सकते हैं। इसमें भूख हड़ताल या पदयात्रा जैसे विकल्प शामिल हैं।
यह मामला दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए थे। इसी दौरान कई लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई।
दिल्ली में प्रदर्शन से पहले हिरासत की कार्रवाई
कॉकroach जनता पार्टी (CJP) की ओर से दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे कई छात्र नेताओं, युवा कार्यकर्ताओं, वकीलों, पत्रकारों और राजनीतिक नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से जुड़ी थी। उनका आरोप था कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि और संबंधित कार्रवाई का आकलन आधिकारिक रिकॉर्ड तथा सभी पक्षों के बयान के आधार पर किया जाना चाहिए।
वांगचुक ने क्या कहा?
सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश साझा कर हिरासत की कार्रवाई पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। लेकिन जब उन्हें पता चला कि प्रदर्शन से जुड़े बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया है, तो उन्हें देश में ‘अघोषित इमरजेंसी’ जैसे हालात महसूस हुए।
वांगचुक ने सरकार से अपील की कि वह हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करे और संबंधित मुद्दों को बातचीत के जरिए सुलझाए। उनका कहना था कि लोकतंत्र में असहमति की आवाज सुनना और लोगों को अपनी बात रखने का अवसर देना जरूरी है।
रिहाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
वांगचुक ने कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों को अगले दिन तक रिहा नहीं किया गया, तो वह खुद विरोध प्रदर्शन करने पर विचार करेंगे। उन्होंने भूख हड़ताल, धरने या पदयात्रा जैसे शांतिपूर्ण तरीकों का विकल्प खुला रखा।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार बातचीत के जरिए मामले का समाधान निकालेगी और उन्हें आंदोलन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। फिलहाल यह उनकी ओर से दी गई चेतावनी है; इसे भूख हड़ताल या पदयात्रा शुरू होने की पुष्टि नहीं माना जाना चाहिए।
लद्दाख में व्यस्तता के कारण दिल्ली नहीं पहुंचे
वांगचुक ने बताया कि वह लद्दाख में सर्दियों की तैयारियों और जल सुरक्षा से जुड़े कार्यों में व्यस्त होने के कारण दिल्ली के प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सके। उनकी टीम कृत्रिम ग्लेशियरों के माध्यम से पानी की उपलब्धता बढ़ाने और ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) यानी हिमनदीय झीलों के फटने से आने वाली बाढ़ के जोखिम पर काम कर रही है।
वांगचुक ने कहा कि उन्होंने प्रदर्शन से पहले शांति और एकता बनाए रखने की अपील की थी। उन्हें उम्मीद थी कि प्रदर्शनकारी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रखेंगे।
लोकतांत्रिक अधिकारों पर बहस तेज
इस घटनाक्रम के बाद शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार, पुलिस कार्रवाई और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर बहस तेज हो गई है। वांगचुक ने सरकार से संयम बरतने और संवाद के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की है।
मामले में आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि हिरासत में लिए गए लोगों के संबंध में प्रशासन क्या कदम उठाता है और संबंधित पक्षों के बीच बातचीत होती है या नहीं। फिलहाल वांगचुक की चेतावनी और प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग इस पूरे विवाद के प्रमुख पहलू बने हुए हैं।
