Yuva Haryana: वोटर लिस्ट तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य को अब हल्के में लेना अधिकारियों और कर्मचारियों को भारी पड़ेगा। चुनाव आयोग ने पीलीभीत में सामने आई वोटर लिस्ट की गड़बड़ियों के बाद बेहद कड़े तेवर अपनाए हैं। आयोग ने यह फैसला किया है कि अब ऐसी गड़बड़ियों में शामिल अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ सिर्फ विभागीय कार्रवाई या निलंबन ही नहीं होगा, बल्कि उन पर लोक प्रतिनिधित्व कानून (आरपी एक्ट) के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 198 के तहत भी मामला दर्ज किया जाएगा। इसके तहत दोषी पाए जाने पर एक साल तक की सजा और जुर्माने दोनों का प्रावधान है।
पीलीभीत मामले के बाद चुनाव आयोग का कड़ा कदम
चुनाव आयोग के अनुसार, शुरुआती शिकायतों और जांच के बाद पीलीभीत मामले में आरोपियों पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 32 और जालसाजी से जुड़ी धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। यह चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर कार्रवाई का पहला ऐसा मामला माना जा रहा है, जिसमें आरपी एक्ट के साथ बीएनएस की धारा जोड़ी गई है। इससे पहले ऐसे मामलों में केवल आरपी एक्ट के तहत ही कार्रवाई की जाती थी।
क्या है बीएनएस की धारा 198?
बीएनएस की धारा 198 लोक सेवकों (यानी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों) द्वारा कानून की जानबूझकर अवहेलना करने और अपने पद का दुरुपयोग करने से संबंधित है। इस धारा के तहत दोषी पाए जाने वाले सरकारी कर्मचारी को एक वर्ष तक का साधारण कारावास, जुर्माना, या फिर दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं।
दो मतदाता पंजीयन अधिकारियों पर गिरी गाज
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए, चुनाव आयोग ने पीलीभीत में वोटर लिस्ट तैयार करने में गड़बड़ी के दोषी पाए गए दो मतदाता पंजीयन अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश दिया है। साथ ही, यह भी निर्देश दिया गया है कि इन्हें मुख्य निर्वाचन अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना सेवा में बहाल नहीं किया जाएगा। आयोग के इस कड़े रुख से चुनावी प्रक्रिया में लापरवाही बरतने वाले महकमे में हड़कंप मच गया है।
