कमजोर मानसून और अल नीनो की चिंता, देश में गेहूं उत्पादन लक्ष्य सिर्फ 3 लाख टन बढ़ा
Yuva India: देश में गेहूं की अगली फसल को लेकर केंद्र सरकार ने इस बार सतर्क रुख अपनाया है। कमजोर मानसून और अल नीनो की संभावित परिस्थितियों के बीच कृषि मंत्रालय ने रबी सीजन 2026-27 के लिए गेहूं उत्पादन का लक्ष्य 12.10 करोड़ टन निर्धारित किया है। यह पिछले सीजन के 12.07 करोड़ टन के लक्ष्य से केवल 3 लाख टन अधिक है। पिछले पांच वर्षों में यह सबसे कम बढ़ोतरी बताई जा रही है।
किसानों और कृषि विशेषज्ञों के लिए यह सीजन कई चुनौतियां लेकर आ सकता है। कम बारिश के कारण मिट्टी में नमी और सिंचाई के पानी की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका है। इसके अलावा अल नीनो के संभावित प्रभाव से तापमान और मौसम के पैटर्न में बदलाव गेहूं की पैदावार तथा दानों की गुणवत्ता पर असर डाल सकता है।
पिछले साल देश में हुआ था 12.07 करोड़ टन उत्पादन
देश में गेहूं का उत्पादन 2021-22 में 10.77 करोड़ टन रहा था। इसके बाद 2022-23 में 11.06 करोड़ टन, 2023-24 में 11.33 करोड़ टन, 2024-25 में 11.79 करोड़ टन और 2025-26 में 12.07 करोड़ टन तक पहुंच गया।
सरकार ने 2026-27 के लिए उत्पादन लक्ष्य 12.10 करोड़ टन रखा है। यानी पिछले साल के मुकाबले लक्ष्य में मामूली बढ़ोतरी की गई है। यह संकेत देता है कि सरकार मौसम और पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए उत्पादन का अनुमान तय कर रही है।
हालांकि, केंद्र सरकार के तीसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक 2025-26 में देश का गेहूं उत्पादन करीब 12.07 करोड़ टन रहा था। कृषि मंत्रालय ने बताया था कि समय पर बुवाई और बेहतर किस्मों के इस्तेमाल से मौसम संबंधी चुनौतियों के बावजूद उत्पादन को सहारा मिला।
हरियाणा में 2 लाख टन बढ़ा उत्पादन लक्ष्य
गेहूं उत्पादन के मामले में हरियाणा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अखबार में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 2021-22 में 104.75 लाख टन गेहूं का उत्पादन हुआ था। 2022-23 में यह बढ़कर 110.64 लाख टन, 2023-24 में 124.82 लाख टन और 2024-25 में 135.80 लाख टन रहा।
2025-26 में उत्पादन 134.43 लाख टन दर्ज किया गया। वहीं, 2026-27 के लिए राज्य का उत्पादन लक्ष्य 125 लाख टन रखा गया है, जबकि पिछले सीजन में यह लक्ष्य 123 लाख टन था। यानी लक्ष्य में 2 लाख टन की बढ़ोतरी की गई है। पिछले साल के वास्तविक उत्पादन के मुकाबले नया लक्ष्य कम है।
कमजोर मानसून से बुवाई और सिंचाई पर असर
इस बार कमजोर मानसून ने रबी फसलों की तैयारी को लेकर चिंता बढ़ाई है। अक्टूबर के आखिरी सप्ताह तक देश में गेहूं की बुवाई पिछले साल की समान अवधि से पीछे चल रही थी। 23 अक्टूबर तक करीब 11 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई हुई थी, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 27 हजार हेक्टेयर था।
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान देश में सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम बारिश हुई। पंजाब और राजस्थान जैसे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में भी बारिश की कमी दर्ज की गई। गेहूं की फसल को अलग-अलग चरणों में सिंचाई की जरूरत होती है, इसलिए मिट्टी में पर्याप्त नमी और पानी की उपलब्धता महत्वपूर्ण होगी।
अल नीनो से दानों की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अल नीनो का असर गेहूं की फसल पर अप्रत्यक्ष रूप से पड़ सकता है। दाने बनने के समय तापमान अधिक रहने से उनकी भरावट और वजन प्रभावित हो सकता है। इससे उत्पादन के साथ-साथ गुणवत्ता पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव मौसम, सिंचाई और फसल की किस्म पर निर्भर करेगा।
किसानों को समय पर बुवाई और सही किस्म चुनने की सलाह
करनाल स्थित गेहूं एवं जौ अनुसंधान निदेशालय के विशेषज्ञों ने किसानों को क्षेत्र के अनुसार उपयुक्त किस्मों का चयन करने, समय पर बुवाई करने और संतुलित उर्वरक इस्तेमाल करने की सलाह दी है। किसानों को प्रमाणित बीजों का उपयोग करना चाहिए और खेत में उपलब्ध नमी तथा सिंचाई के पानी को ध्यान में रखकर बुवाई की योजना बनानी चाहिए।
विशेषज्ञों का जोर है कि अनावश्यक देरी से बचें, क्योंकि देर से बुवाई करने पर फसल के दाना भरने के समय तापमान बढ़ने का जोखिम रहता है। सिंचाई भी फसल की जरूरत और मिट्टी की स्थिति के अनुसार करें।
कुल मिलाकर, 2026-27 का गेहूं सीजन मौसम, पानी की उपलब्धता और बुवाई के समय पर निर्भर करेगा। किसानों के लिए वैज्ञानिक सलाह और क्षेत्र के अनुकूल किस्मों का चयन इस बार खास महत्व रखेगा।
