महाराष्ट्र की प्रमुख मंडियों में प्याज के दाम 4,551 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचे, नई फसल की आवक देर से होने के कारण कीमतें और बढ़ने की आशंका
Yuva India: देश में प्याज की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। खरीफ फसल की कटाई और मंडियों में नई उपज पहुंचने में देरी के कारण पिछले एक सप्ताह में थोक बाजार में प्याज के दाम करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। कारोबारियों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में कीमतों में प्रति किलो 8 से 10 रुपये तक और बढ़ोतरी हो सकती है। इससे त्योहारों के मौसम में आम उपभोक्ताओं की रसोई का बजट प्रभावित होने की आशंका है।
महाराष्ट्र की प्रमुख प्याज मंडियों में कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। देश के बड़े प्याज व्यापार केंद्रों में शामिल लासलगांव मंडी में सोमवार को प्याज का भाव 4,551 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। नई फसल की आवक में देरी को इस तेजी की प्रमुख वजह बताया जा रहा है।
लासलगांव मंडी में प्याज के दाम बढ़े
महाराष्ट्र की लासलगांव मंडी में प्याज की कीमतों में हाल के दिनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। यहां थोक भाव पिछले एक सप्ताह में लगभग 10 प्रतिशत बढ़े हैं। लासलगांव देश के प्रमुख प्याज व्यापार केंद्रों में शामिल है और यहां के भाव का असर अन्य मंडियों के कारोबार पर भी पड़ता है।
महाराष्ट्र राज्य कृषि विपणन बोर्ड (MSAMB) के आंकड़ों के अनुसार, मंडी में प्याज की दैनिक आवक पहले के मुकाबले घटकर लगभग 15 प्रतिशत रह गई है। आपूर्ति में कमी के कारण कीमतों पर दबाव बढ़ा है। कारोबारियों का कहना है कि यदि नई फसल समय पर मंडियों तक नहीं पहुंचती, तो कीमतों में और तेजी आ सकती है।
खरीफ फसल की आवक में देरी बनी मुख्य वजह
प्याज की कीमतों में तेजी के पीछे खरीफ फसल की कटाई और आवक में देरी को अहम कारण माना जा रहा है। सामान्य तौर पर खरीफ प्याज की नई फसल नवंबर-दिसंबर के आसपास बाजार में पहुंचने लगती है। लेकिन इस बार फसल की आवक में लगभग एक महीने की देरी बताई जा रही है।
क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुषण शर्मा के अनुसार, खरीफ प्याज की आवक में देरी के कारण बाजार में उपलब्धता प्रभावित हुई है। उन्होंने बताया कि प्याज की कीमतों में मौजूदा तेजी का संबंध नई फसल के देर से आने और बाजार में आपूर्ति कम रहने से है।
खरीफ प्याज की फसल आमतौर पर सालाना उत्पादन का बड़ा हिस्सा होती है। इसलिए इसकी आवक में देरी होने पर बाजार में उपलब्धता और कीमतों पर व्यापक असर पड़ सकता है।
रबी प्याज का स्टॉक भी घटा
खरीफ फसल में देरी के साथ रबी प्याज का भंडार भी कम हो रहा है। रबी प्याज की फसल आम तौर पर फरवरी से अप्रैल के बीच काटी जाती है और सालाना उत्पादन में इसका हिस्सा लगभग दो-तिहाई बताया गया है।
इस बार रबी प्याज का स्टॉक घटने और खरीफ फसल की आवक देर से होने के कारण बाजार में आपूर्ति की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। व्यापारियों का कहना है कि यदि उपलब्ध स्टॉक कम होता रहा और नई फसल आने में देरी जारी रही, तो आने वाले दिनों में कीमतों में और वृद्धि हो सकती है।
त्योहारों के मौसम में महंगाई का दबाव
अक्टूबर में त्योहारों के दौरान प्याज की मांग बनी रहती है। ऐसे समय में कीमतें बढ़ने से घरेलू बजट पर असर पड़ सकता है। कारोबारियों को आशंका है कि आने वाले दिनों में प्याज के दाम 8 से 10 रुपये प्रति किलो तक और बढ़ सकते हैं।
हालांकि, कीमतों में वास्तविक बदलाव नई फसल की आवक, मंडियों में उपलब्ध स्टॉक और मांग पर निर्भर करेगा। यदि खरीफ प्याज की आवक में सुधार होता है, तो कीमतों को स्थिर होने में मदद मिल सकती है।
किसानों और उपभोक्ताओं की नजर बाजार पर
प्याज की कीमतों में तेजी से किसानों को बेहतर भाव मिलने की संभावना बनती है, लेकिन कम आपूर्ति के कारण व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर दबाव बढ़ सकता है। बाजार की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि नई फसल कितनी जल्दी मंडियों तक पहुंचती है और उपलब्ध स्टॉक मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है या नहीं।
कुल मिलाकर, खरीफ प्याज की आवक में देरी और रबी स्टॉक में कमी के कारण कीमतों में तेजी आई है। आने वाले सप्ताहों में नई फसल की स्थिति प्याज के बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
