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भारत

FSSAI का बड़ा कदम: शिशु आहार में अतिरिक्त चीनी (Sucrose & Fructose) पर बैन का प्रस्ताव

Khushi Mukhija
Last updated: October 17, 2026 5:23 pm
Khushi Mukhija
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Yuva India: भारत की खाद्य सुरक्षा नियामक agency FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) ने नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। FSSAI ने 6 महीने तक के शिशुओं के लिए बनने वाले खाद्य उत्पादों (Infant Food) में सूक्रोज (Sucrose) और फ्रक्टोज (Fructose) जैसी अतिरिक्त चीनी मिलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव दिया है।

मुख्य बिंदु (Key Highlights)

6 महीने तक के बच्चों के आहार पर सख्ती: शिशु पोषण उत्पादों में सूक्रोज और फ्रक्टोज के अतिरिक्त इस्तेमाल पर रोक का प्रस्ताव।

मौजूदा नियम: वर्तमान नियमों के तहत लैक्टोज (Lactose) और ग्लूकोज पॉलिमर (Glucose Polymers) प्राथमिक कार्बोहाइड्रेट स्रोत हैं, जबकि जरूरत पड़ने पर तय सीमा के अंदर सूक्रोज और फ्रक्टोज की अनुमति थी।

मोटापे से बचाव: FSSAI का कहना है कि इस फैसले का मुख्य उद्देश्य बच्चों को बचपन से ही अतिरिक्त चीनी के संपर्क में आने से बचाना और चाइल्डहुड ओबेसिटी (बाल मोटापा) के खतरों को कम करना है।

सामने आ रही चिंताजनक रिपोर्ट: ‘द लैंसेट’ (The Lancet) मेडिकल जर्नल के अनुसार, भारत में 2021 में 18 करोड़ वयस्क अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त थे, जिसके 2050 तक बढ़कर 45 करोड़ होने का अनुमान है।

विस्तृत रिपोर्ट

  1. खाद्य सुरक्षा पर FSSAI की देशव्यापी सख्ती

भारत में हाल के महीनों में खाद्य सुरक्षा नियमों को लेकर कार्रवाई काफी तेज हो गई है। स्थानीय भोजनालयों से लेकर बड़े ब्रांडेड रेस्तरांओं पर सुरक्षा मानकों का पालन न करने पर निलंबन की कार्रवाई की गई है। इसके अलावा, पैक्ड फूड इंडस्ट्री पर फ्रंट-ऑफ-पैक वॉर्निंग लेबल (Front-of-pack warning labels) लगाने के दबाव ने पूरे पैकेज्ड फूड सेक्टर को हिलाकर रख दिया है।

  1. वार्निंग लेबल (Front-of-Pack Warning Labels) के नियम सख्त

FSSAI ने हाल ही में अपने चेतावनी लेबल वाले नियमों को और कड़ा किया है:

अगस्त में FSSAI ने चीनी, नमक या सेचुरेटेड फैट में से किन्हीं दो या अधिक की उच्च मात्रा होने पर लाल षट्कोणीय (Red Hexagonal) स्टैंप का प्रस्ताव दिया था।

जनता और विशेषज्ञों के विरोध/प्रतिक्रिया के बाद, FSSAI ने इस प्रस्ताव को और सख्त कर दिया। अब यदि उत्पाद में केवल एक भी पोषक तत्व निर्धारित सीमा से अधिक होता है, तो वार्निंग लेबल लगाना अनिवार्य होगा।

  1. बाल मोटापे की समस्या पर कड़ा प्रहार

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने देश में तेजी से बढ़ती मोटापे की दर पर लंबे समय से चिंता जताई है। FSSAI के इस नए कदम से शिशु आहार (0 से 24 महीने तक के बच्चों के पोषण उत्पाद) में चीनी की मात्रा पर लगाम लगेगी, जिससे भविष्य में बच्चों को ओबेसिटी, डायबिटीज और अन्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बचाया जा सके।

संपादकीय टिप्पणी / डिस्क्लेमर:

यह प्रस्ताव भारत के $100 बिलियन से अधिक के पैकेज्ड फूड उद्योग के नियमों में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।

 

 

TAGGED:banfoodinfantproposalsucrosesugar
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