Yuva Haryana : भारत में बढ़ते साइबर क्राइम के मामलों पर केंद्रीय संसदीय समिति की रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 से 2024 के बीच नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर 53.93 लाख शिकायतें आई, लेकिन एफआईआर सिर्फ 1.30 लाख यानी 2.4 प्रतिशत मामलों में ही दर्ज हुई।
साइबर क्राइम की शिकायतों में बढोतरी
गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति की 25वीं रिपोर्ट के अनुसार 2019 में साइबर क्राइम की 26,049 शिकायतें दर्ज हुई थी, जो 2024 में बढ़कर 20,33,316 हो गई।
शिकायतों और एफआईआर में बड़ा फर्क
रिपोर्ट के मुताबिक अपराध की शिकायतों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है लेकिन एफआईआर दर्ज होने का अनुपात कम रहा है।
साल 2019 में दर्ज 26,049 शिकायतों में से 4 प्रतिशत पर एफआईआर हुई। 2024 में शिकायतें 78 गुना बढ़ीं, पर एफआईआर का अनुपात 2.4 प्रतिशत रह गया।
पोर्टल पर दर्ज मामलों में ठगी के मामलें करीब 31,594 करोड़ रूपये रही, इनमें करीब 85 प्रतिशत शिकायतें साइबर वित्तीय अपराधों से जुड़ी थी।
डेटा में गड़बड़ी
संसदीय समिति ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों और साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के डेटा के बीच अंतर का उल्लेख किया है। सीमित ने उजागर किया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ‘प्रिंसिपल ऑफेंस रूल’ पर काम करता है। न
रिपोर्ट में कहा गया कि कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित आंकड़े सही तरीके से दर्ज नहीं किए जा रहे हैं।
समिति ने दिए ये सुझाव
एफआईआर दर्ज नहीं करने वाले अफसरों के खिलाफ गृह मंत्रालय दंडात्मक कार्रवाई करे।
मानवीय दखल खत्म करने को लेकर ई एफआईआर व्यवस्था लागू हो।
एनसीआरबी अपनी प्रणाली में मल्टी-टैगिंग शुरू करें, ताकि एक ही केस में शामिल सभी अपराधों की सही गिनती हो सके।
हर राज्य में शिकायत दर्ज करने व निपटाने की समान व्यवस्था होनी चाहिए।
शिकायत मिलने पर कार्रवाई व समाधान तय सीमा में हो।
पुलिस भर्ती के शुरूआती स्तर पर साइबर सुरक्षा कोर्स अनिवार्य किया जाए।
