ट्रेलर में डॉक्टरों को कथित तौर पर भ्रष्ट दिखाने पर IMA हरियाणा ने जताई आपत्ति, फिल्म की रिलीज रोकने और कार्रवाई की चेतावनी
Yuva India: अभिनेता सनी देओल की आगामी फिल्म ‘सूर्या’ रिलीज से पहले विवादों में घिर गई है। फिल्म के ट्रेलर में डॉक्टरों को कथित तौर पर भ्रष्ट दिखाए जाने पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की हरियाणा शाखा ने आपत्ति जताई है। संगठन ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सेंसर बोर्ड) को पत्र भेजकर फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने और आपत्तिजनक दृश्यों को हटाने की मांग की है।
डॉक्टरों के संगठन का कहना है कि फिल्म में चिकित्सा पेशे से जुड़े लोगों की छवि को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उसकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो डॉक्टर आंदोलन करने और कानूनी रास्ता अपनाने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
सेंसर बोर्ड को पत्र लिखकर जताया विरोध
IMA हरियाणा की अध्यक्ष डॉ. सुनीता सोनी, मानद सचिव डॉ. योगेश जिंदल और अन्य पदाधिकारियों ने सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष को पत्र भेजा है। पत्र में फिल्म के ट्रेलर में डॉक्टरों को भ्रष्ट दिखाने वाले कथित चित्रण पर आपत्ति जताई गई है।
संगठन ने मांग की है कि फिल्म में मौजूद आपत्तिजनक दृश्यों की समीक्षा की जाए और उन्हें हटाए बिना फिल्म को रिलीज करने की अनुमति न दी जाए। IMA का मानना है कि इस तरह का चित्रण आम लोगों के बीच डॉक्टरों को लेकर गलत धारणा पैदा कर सकता है।
हालांकि, फिल्म निर्माताओं या सेंसर बोर्ड की ओर से इस विवाद पर किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी अखबार की कटिंग में नहीं दी गई है।
डॉक्टरों की छवि खराब होने की आशंका
IMA के अनुसार, डॉक्टर समाज में मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में किसी फिल्म में पूरे चिकित्सा समुदाय को भ्रष्ट दिखाना उचित नहीं है। संगठन का कहना है कि कुछ व्यक्तियों के गलत कामों के आधार पर पूरे पेशे की छवि को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।
डॉक्टरों ने यह भी कहा कि चिकित्सा पेशे में आने के लिए लंबी पढ़ाई और प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है। अखबार में प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, संगठन ने बताया कि डॉक्टर बनने के लिए करीब 10 से 12 साल तक की शिक्षा और प्रशिक्षण की जरूरत हो सकती है।
IMA का तर्क है कि डॉक्टरों के काम और पेशे की जिम्मेदारियों को समझे बिना उनका नकारात्मक चित्रण करना मरीजों और चिकित्सकों के बीच भरोसे को प्रभावित कर सकता है।
99 प्रतिशत डॉक्टर ईमानदारी से करते हैं इलाज: IMA
IMA के हवाले से कहा गया है कि लगभग 99 प्रतिशत डॉक्टर ईमानदारी से मरीजों का इलाज करते हैं। संगठन का कहना है कि बीमारी की स्थिति का आकलन हमेशा आसान नहीं होता और सही निदान तक पहुंचने के लिए चिकित्सकों को कई बार जटिल परिस्थितियों में निर्णय लेना पड़ता है।
IMA के अनुसार, चिकित्सा क्षेत्र में काम करने वाले अधिकांश डॉक्टर मरीजों के हित को ध्यान में रखकर अपनी सेवाएं देते हैं। इसलिए किसी पेशे के कुछ नकारात्मक उदाहरणों के आधार पर सभी डॉक्टरों को एक ही नजर से देखना उचित नहीं है।
संगठन ने आशंका जताई है कि फिल्मों में डॉक्टरों को गलत तरीके से पेश करने से मरीजों और चिकित्सकों के बीच भरोसे का रिश्ता कमजोर हो सकता है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लोगों की सोच भी प्रभावित हो सकती है।
फिल्म की रिलीज रोकने और दृश्यों की समीक्षा की मांग
IMA हरियाणा ने सेंसर बोर्ड से मांग की है कि फिल्म में आपत्तिजनक बताए जा रहे दृश्यों की समीक्षा की जाए और संगठन के प्रतिनिधियों को फिल्म दिखाई जाए। संगठन चाहता है कि विवादित दृश्यों को हटाने के बाद ही फिल्म की रिलीज पर आगे बढ़ा जाए।
संगठन ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उसकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो वह आंदोलन करने और कानूनी विकल्प अपनाने पर विचार कर सकता है।
अब सेंसर बोर्ड और निर्माताओं के जवाब पर नजर
फिलहाल विवाद का केंद्र फिल्म में डॉक्टरों के कथित चित्रण को लेकर उठी आपत्ति है। एक ओर IMA चिकित्सा पेशे की छवि और डॉक्टरों के प्रति जनता के भरोसे को लेकर चिंतित है, वहीं मामले में सेंसर बोर्ड और फिल्म निर्माताओं की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
आगे यह देखना होगा कि सेंसर बोर्ड शिकायत पर क्या कदम उठाता है और फिल्म के निर्माताओं की ओर से इस विरोध पर क्या जवाब दिया जाता है। फिलहाल IMA हरियाणा ने अपनी मांगें स्पष्ट करते हुए आपत्तिजनक दृश्यों की समीक्षा और उचित कार्रवाई की मांग की है।

