संसदीय समिति के सामने उच्च शिक्षा विभाग के दावे पर सवाल, NEET-UG पेपर लीक मामले में CBI की जांच भी चर्चा में
Yuva India: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। शिक्षा मंत्रालय ने संसदीय समिति के सामने दावा किया कि NTA के गठन के बाद आठ साल में कोई पेपर लीक नहीं हुआ। वहीं, उच्च शिक्षा विभाग की ओर से पेश आंकड़ों में परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों और अदालतों में लंबित मामलों का जिक्र किया गया। समिति ने NTA से जुड़ी शिकायतों और जांच की स्थिति पर अधिक पारदर्शिता की जरूरत बताई है।
राज्यसभा सांसद मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में NTA से संबंधित मामलों का विवरण दिया। समिति के अनुसार, वर्ष 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट में अदालतों में NTA से जुड़े 474 मामलों का उल्लेख किया गया है। इनमें कुछ मामलों में NTA भी याचिकाकर्ता है। इसलिए इन सभी मामलों को पेपर लीक के मामले मानना सही नहीं होगा।
2024 में NEET-UG से जुड़े 356 मामले
वर्ष 2024 में NEET-UG परीक्षा से संबंधित 356 मामले दर्ज हुए। इसके अलावा, JEE Main से जुड़े 31, UGC-NET के 26, CUET-UG के 14, AIIMS-RR के 7 और AIIMS-PG के 4 मामले बताए गए हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2024 में दर्ज 356 NEET-UG मामलों में से कई परीक्षा की प्रक्रिया और कथित अनियमितताओं से जुड़े थे। NEET-UG देशभर के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाने वाली महत्वपूर्ण परीक्षा है। इसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का असर लाखों विद्यार्थियों और उनके भविष्य पर पड़ सकता है।
समिति ने लोक परीक्षा अधिनियम, 2024 के लागू होने के बाद विभिन्न परीक्षाओं से संबंधित दर्ज FIR का ब्योरा भी अपनी रिपोर्ट में शामिल किया है। हालांकि, FIR दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि सभी आरोप अदालत में साबित हो चुके हैं।
पेपर लीक पर कानून बनाने की जरूरत क्यों पड़ी?
रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद संसद ने लोक परीक्षा अधिनियम, 2024 पारित किया था। इस कानून का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों और संगठित गड़बड़ियों पर रोक लगाना है।
ऐसे में उच्च शिक्षा विभाग का यह दावा कि NTA के गठन के बाद आठ वर्षों में कोई पेपर लीक नहीं हुआ, चर्चा का विषय बना है। समिति ने परीक्षा से जुड़ी शिकायतों, FIR और जांच की स्थिति का व्यापक विवरण उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया है।
पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितता के बीच अंतर को समझना भी जरूरी है। किसी परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने, नकल, परीक्षा केंद्र पर गड़बड़ी या अन्य अनियमितताओं के आरोप अलग-अलग प्रकृति के हो सकते हैं। प्रत्येक मामले में जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।
समिति ने जांच की स्थिति सार्वजनिक करने की सिफारिश की
संसदीय समिति ने सिफारिश की है कि उच्च शिक्षा विभाग और संबंधित एजेंसियां NTA की परीक्षाओं से जुड़े मामलों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार करें। इसमें पेपर लीक, FIR, जांच और कानूनी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट रूप से शामिल होनी चाहिए।
समिति का मानना है कि ऐसी जानकारी सार्वजनिक होने से विद्यार्थियों और अभिभावकों का परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा बढ़ाने में मदद मिल सकती है। परीक्षा संबंधी शिकायतों के निपटारे और जांच की प्रगति पर नियमित जानकारी उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है।
NEET-UG मामले में CBI की जांच
रिपोर्ट में NEET-UG पेपर लीक मामले में CBI की जांच का भी उल्लेख है। एजेंसी इस मामले में आरोपियों की भूमिका और कथित नेटवर्क की जांच कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, CBI ने एक आरोपी के खिलाफ दिल्ली की अदालत में पूरक आरोपपत्र दाखिल किया। अदालत ने आरोपी के वकील को आरोपपत्र की प्रति देने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई गुरुवार के लिए निर्धारित की गई थी।
जांच एजेंसियों की कार्रवाई और अदालत में चल रही प्रक्रिया के बीच अंतिम निष्कर्ष न्यायिक निर्णय के बाद ही निकाला जा सकता है।
कुल मिलाकर, NTA की परीक्षाओं की विश्वसनीयता, पेपर लीक से जुड़े आरोपों और जांच की पारदर्शिता को लेकर संसदीय समिति ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। विद्यार्थियों के हित में जरूरी है कि परीक्षा व्यवस्था सुरक्षित हो और किसी भी शिकायत की निष्पक्ष जांच समय पर पूरी की जाए।

