Yuva India: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने छोटे और मध्यम उद्योगों (SME) को प्रोत्साहन देने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के ‘SME ग्रोथ फंड’ के प्रस्ताव को आधिकारिक मंज़ूरी दे दी है। वित्त मंत्रालय द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव का उद्देश्य देश के विनिर्माण, सेवा, तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भारतीय उद्यमों को वैश्विक स्तर पर सक्षम बनाना है।
गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026 में इस फंड की घोषणा की थी।
ख़बर के मुख्य बिंदु
दीर्घकालिक पूंजी: यह फंड छोटे और मध्यम विनिर्माण उद्यमों को दीर्घकालिक इक्विटी सहायता प्रदान करेगा, जिससे वे अपने परिचालन को बढ़ा सकें और नई तकनीकों में निवेश कर सकें।
टियर-2 और टियर-3 शहरों पर ध्यान: आवंटन का बड़ा हिस्सा टियर-II और टियर-III शहरों के औद्योगिक क्लस्टरों में स्थित SMEs को दिया जाएगा।
इक्विटी गैप को भरना: वर्तमान में मौजूद अधिकांश फंड शुरुआती दौर और सूक्ष्म उद्यमों पर केंद्रित हैं। यह नया फंड SMEs के लिए इक्विटी ग्रोथ कैपिटल में मौजूद ढांचागत कमी को पूरा करेगा।
वैश्विक पहचान: इस फंड की मदद से भारतीय एमएसएमई (SMEs) को अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में विस्तार करने और ग्लोबल वैल्यू चेन से जुड़ने में मदद मिलेगी।
SME सेक्टर को मज़बूत करने की व्यापक रणनीति
सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, यह ग्रोथ फंड एमएसएमई (SME) क्षेत्र को सशक्त बनाने के व्यापक सुधारों का हिस्सा है। सरकार इसके साथ ही डिजिटलीकरण, आसान क्रेडिट सपोर्ट, ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस (Ease of Doing Business), सार्वजनिक खरीद सुधार और प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी योजनाओं के माध्यम से छोटे उद्योगों को निरंतर बढ़ावा दे रही है।
