Yuva India: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल और उससे जुड़े सुरक्षा जोखिमों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रमुख टेक कंपनियों के अधिकारियों के बीच एक स्वैच्छिक समझौता हुआ है। इसमें एआई कंपनियों से अपने एडवांस्ड मॉडल की सुरक्षा के लिए चार स्तरों पर निगरानी और ऑडिट की व्यवस्था करने को कहा गया है।
समझौते में Open एआई, Google, Meta, Anthropic, Nvidia और एक्स एआई जैसी कंपनियां शामिल हैं। इसका उद्देश्य एआई मॉडल से जुड़े साइबर हमले, बायोसेक्योरिटी, केमिकल खतरों और अनधिकृत सिस्टम एक्सेस जैसे जोखिमों की निगरानी करना है।
चार स्तरों पर होगी एआई की निगरानी
समझौते के तहत कंपनियों को एआई सुरक्षा के लिए चार स्तरों की व्यवस्था करने को कहा गया है:
आंतरिक निगरानी: एआई मॉडल की ट्रेनिंग और इस्तेमाल के दौरान सुरक्षा जोखिमों की लगातार निगरानी।
आंतरिक ऑडिट टीम: सुरक्षा नियंत्रणों की जांच और सामने आने वाली कमजोरियों पर क
स्वतंत्र बाहरी ऑडिट: बाहरी मूल्यांकनकर्ता एआई सुरक्षा व्यवस्था की स्वतंत्र जांच करेंगे।
बोर्ड स्तर की निगरानी: कंपनी के बोर्ड की स्वतंत्र समिति को ऑडिट रिपोर्ट की जानकारी दी जाएगी।
एआई के दूसरे सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच रोकने पर जोर
नए ढांचे में यह सुनिश्चित करने पर जोर है कि एआई मॉडल बिना अनुमति के दूसरे तकनीकी सिस्टम या महत्वपूर्ण नेटवर्क तक पहुंच न बना सकें। साथ ही साइबर हमले और जैविक या रासायनिक खतरों से जुड़े संभावित इस्तेमाल की भी निगरानी की जाएगी।
समझौता फिलहाल स्वैच्छिक
यह समझौता फिलहाल कानूनी रूप से बाध्यकारी कानून नहीं, बल्कि स्वैच्छिक प्रतिबद्धता है। इसमें कंपनियों से अपने स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था लागू करने और बाहरी ऑडिट कराने की अपेक्षा की गई है। समझौते में भविष्य में इन उपायों को कानून या नियमों का हिस्सा बनाने की संभावना भी रखी गई है।
