Yuva India: देश की आर्थिक प्रगति का आकलन करने के लिए सरकार अब डिजिटल लेन-देन और यूपीआई (UPI) भुगतान से जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने इसके लिए एक नया फॉर्मूला तैयार किया है। इसके तहत सड़क किनारे चाय बेचने वालों से लेकर अस्पतालों और सरकारी सेवाओं तक में होने वाले डिजिटल भुगतान को आर्थिक गतिविधियों के आकलन में शामिल किया जाएगा।
डिजिटल भुगतान से सामने आएगी अर्थव्यवस्था की असली तस्वीर
नई व्यवस्था का उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र के योगदान को अधिक सटीक तरीके से मापना है। इसके लिए यूपीआई और अन्य डिजिटल भुगतान के आंकड़ों को आर्थिक गतिविधियों के आकलन में शामिल किया जाएगा। इससे उन छोटे कारोबारियों और सेवा प्रदाताओं की गतिविधियों का भी बेहतर अनुमान लगाया जा सकेगा, जिनका पूरा लेन-देन पारंपरिक आर्थिक आंकड़ों में दर्ज नहीं हो पाता।
चाय की दुकान से अस्पताल तक के आंकड़े होंगे शामिल
नई पद्धति में छोटे दुकानदारों, अस्पतालों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और सरकारी विभागों में होने वाले डिजिटल लेन-देन को महत्व दिया जाएगा। इसका मकसद सेवा क्षेत्र की वास्तविक आर्थिक गतिविधियों को समझना और उसके योगदान का अधिक व्यापक आकलन करना है।
सेवा क्षेत्र के आकलन में होगा बदलाव
मंत्रालय की योजना के अनुसार, डिजिटल भुगतान से प्राप्त आंकड़ों को मौजूदा आर्थिक संकेतकों के साथ जोड़कर सेवा क्षेत्र की स्थिति का आकलन किया जाएगा। इससे अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलावों को समझने और नीतिगत फैसले लेने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, डिजिटल लेन-देन का आंकड़ा अकेले आर्थिक उत्पादन का पूरा प्रतिनिधित्व नहीं करता। इसलिए इसके इस्तेमाल में अन्य आर्थिक आंकड़ों और सांख्यिकीय तरीकों को भी ध्यान में रखना जरूरी होगा।
शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाओं पर भी नजर
प्रस्तावित व्यवस्था में शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाओं जैसे क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों का आकलन भी शामिल है। इससे सेवा क्षेत्र के योगदान की तस्वीर अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है। नई पद्धति के लागू होने पर डिजिटल भुगतान के आंकड़े देश की आर्थिक स्थिति का आकलन करने में एक महत्वपूर्ण संकेतक बन सकते हैं।

