Yuva India: पारंपरिक भारतीय समाज में जहां शादी को जीवन का एक अनिवार्य और सबसे बड़ा पड़ाव माना जाता था, वहीं अब देश की युवा महिलाओं की सोच में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। हालिया आंकड़ों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में अधिक संख्या में महिलाएं शादी से दूरी बना रही हैं या फिर अपनी शादी की उम्र को काफी आगे बढ़ा रही हैं।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) और अन्य सरकारी रिपोर्ट्स के आंकड़े बताते हैं कि देश में अविवाहित महिलाओं की हिस्सेदारी में इजाफा हुआ है। 2011 में जहां 20 वर्ष से अधिक उम्र की अविवाहित महिलाओं का प्रतिशत करीब 13.5% था, वहीं यह बढ़कर लगभग 19.9% तक पहुंच गया है।
आखिर क्यों बदल रहा है महिलाओं का यह रवैया? आइए जानते हैं इसके पीछे की मुख्य वजहें:
- उच्च शिक्षा और वित्तीय स्वतंत्रता (Financial Independence)
आज की भारतीय महिलाएं पढ़ाई और करियर को प्राथमिकता दे रही हैं। बेहतर शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता के कारण अब महिलाओं के लिए शादी केवल “वित्तीय सुरक्षा” का जरिया नहीं रह गई है। वे अपनी मेहनत के दम पर खुद आत्मनिर्भर बन रही हैं, जिससे वे जीवनसाथी चुनने के मामले में अधिक समझदार और स्पष्ट हो गई हैं।
- पारंपरिक भूमिकाओं और घरेलू काम के बोझ पर सवाल
कई महिलाएं शादी के बाद घर-गृहस्ती और बच्चों की देखभाल में अपने करियर और सपनों के कुर्बान होने को लेकर जागरूक हो चुकी हैं। वे पारंपरिक रूप से महिलाओं पर थोपे जाने वाले असमान घरेलू कामकाज (Unequal Domestic Labour) और समझौतों के चक्र से बचना चाहती हैं।
- पिछली पीढ़ियों के अनुभवों से सीख
अक्सर युवा महिलाएं अपने परिवार में अपनी मां या अन्य महिलाओं के संघर्षों को बहुत करीब से देखती हैं। कई महिलाओं ने देखा है कि कैसे उनकी माताओं ने अपनी खुशियों और करियर का त्याग किया। इस पीढ़ी की बेटियां प्यार और साथ तो चाहती हैं, लेकिन अपनी स्वतंत्र पहचान को खोकर नहीं।
- शादी को ‘अनिवार्य‘ की जगह ‘विकल्प‘ मानना
आज की पीढ़ी के लिए शादी अब जीवन का एकमात्र लक्ष्य नहीं रह गया है। वे जीवनसाथी में बराबरी, आपसी सम्मान और मानसिक जुड़ाव को तवज्जो देती हैं। यदि उन्हें ऐसा पार्टनर नहीं मिलता, तो वे अकेले रहने या सिंगल लाइफ को चुनना ज्यादा बेहतर मानती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि महिलाएं पूरी तरह से रिश्तों के खिलाफ हैं, बल्कि वे अब अपनी शर्तों पर जीवन जीने और एक मजबूत ‘चॉइसेज’ (विकल्प) आधारित समाज की ओर बढ़ रही हैं।

