ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों की मौजूदगी को देखते हुए एयरपोर्ट, होटल, भारत मंडपम, वीवीआईपी रूट और हवाई क्षेत्र तक बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं। दोनों देशों की विशेष सुरक्षा टीमें भारतीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर रही हैं।
करीब 30 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात
ब्रिक्स सम्मेलन में सदस्य और साझेदार देशों के प्रतिनिधियों की बड़ी संख्या को देखते हुए दिल्ली में करीब 30 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है।
इनमें दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की कंपनियां भी शामिल हैं। एयरपोर्ट, भारत मंडपम और उन होटलों के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई है, जहां विदेशी प्रतिनिधिमंडल ठहरे हुए हैं।
शहर के संवेदनशील इलाकों को अलग-अलग सुरक्षा सेक्टर में बांटा गया है। प्रत्येक सेक्टर की जिम्मेदारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी गई है।
एंटी-ड्रोन सिस्टम से भी निगरानी
भारत मंडपम और दूसरे महत्वपूर्ण स्थानों के आसपास एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियां जमीन के साथ आसमान से आने वाले संभावित खतरे पर भी नजर रख रही हैं।
सम्मेलन स्थल के आसपास कई स्तर की जांच की व्यवस्था की गई है। प्रवेश केवल अधिकृत व्यक्तियों और वाहनों को ही दिया जा रहा है।
होटलों में भी कई स्तर की सुरक्षा
विदेशी नेताओं के ठहरने वाले होटलों में ग्राउंड फ्लोर से लेकर ऊपरी मंजिलों और छत तक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं।
होटल कर्मचारियों का भी सत्यापन कराया गया है। सुरक्षा एजेंसियों ने उनके स्थानीय रिकॉर्ड के साथ जरूरत के मुताबिक गृह राज्यों से भी जानकारी जुटाई है।
रूस और चीन की एडवांस सुरक्षा टीमें भी भारतीय अधिकारियों के साथ होटल और यात्रा मार्गों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर रही हैं।
पुतिन और जिनपिंग के लिए तय किए गए विशेष रूट
विदेशी मेहमानों के एयरपोर्ट से होटल और वहां से भारत मंडपम तक आने-जाने के लिए पहले से रूट तय किए गए हैं।
पुतिन और शी जिनपिंग के काफिलों को देखते हुए कुछ मार्गों पर अतिरिक्त सुरक्षा रखी गई है। वीवीआईपी काफिले के गुजरने के दौरान जरूरत पड़ने पर कुछ समय के लिए यातायात रोका जा सकता है।
सम्मेलन के दौरान दिल्ली की कई प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक डायवर्जन और प्रतिबंध लागू हैं। यात्रियों को एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन के लिए सामान्य से अधिक समय लेकर निकलने की सलाह दी गई है।
आसमान में भी बढ़ाई गई सुरक्षा
ब्रिक्स सम्मेलन की सुरक्षा केवल सड़कों तक सीमित नहीं रखी गई है। दिल्ली और आसपास के हवाई क्षेत्र में भी विशेष उड़ान नियम लागू किए गए हैं।
नियमित यात्री विमानों का संचालन जारी रह सकता है, लेकिन कुछ क्षेत्रों और ऊंचाई को लेकर अतिरिक्त निर्देश लागू हैं।
विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की विशेष उड़ानों को पहले से मंजूर फ्लाइट प्लान के आधार पर अनुमति दी जा रही है। भारतीय वायुसेना और दूसरी अधिकृत एजेंसियों की उड़ानों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है।
आपातकालीन चिकित्सा या विशेष सरकारी जरूरतों से जुड़ी कुछ उड़ानों को भी निर्धारित नियमों के तहत अनुमति मिल सकती है।
सोशल मीडिया और डिजिटल गतिविधियों पर नजर
सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और दूसरे डिजिटल माध्यमों की भी निगरानी कर रही हैं।
किसी विरोध प्रदर्शन के आह्वान, संदिग्ध गतिविधि, भड़काऊ संदेश या वीवीआईपी कार्यक्रम में बाधा डालने की कोशिश से जुड़ी जानकारी पर नजर रखी जा रही है।
सम्मेलन स्थल, होटल, प्रमुख परिवहन केंद्र और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों के आसपास पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी गई है।
किसी अचानक प्रदर्शन या दूसरे सुरक्षा हालात से निपटने के लिए भी अलग-अलग आकस्मिक योजनाएं तैयार की गई हैं।
पुतिन के लिए चार स्तर का सुरक्षा घेरा
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सुरक्षा को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं। उनके होटल और कार्यक्रम स्थलों पर कई स्तर की सुरक्षा रखी गई है।
पहले स्तर पर उनके सबसे करीब क्लोज प्रोटेक्शन टीम मौजूद रहती है।
दूसरे स्तर की जिम्मेदारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और विशेष सुरक्षा कर्मियों के पास रहती है।
तीसरे स्तर में कमांडो और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात रहते हैं।
चौथे और बाहरी स्तर की जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस संभालती है, जो होटल और आसपास के पूरे इलाके पर नजर रखती है।
पुतिन के साथ रूस की अपनी सुरक्षा टीम भी मौजूद रहती है, जो भारतीय एजेंसियों के साथ मिलकर सुरक्षा व्यवस्था संभालती है।
खास बख्तरबंद कार में चलते हैं पुतिन
विदेशी यात्राओं के दौरान रूसी राष्ट्रपति के काफिले में उनकी विशेष बख्तरबंद लिमोजिन Aurus Senat भी शामिल रहती है।
यह कार बुलेटप्रूफ बॉडी, मजबूत शीशों और रन-फ्लैट टायर जैसी सुरक्षा सुविधाओं से लैस बताई जाती है। इसे रूसी राष्ट्रपति की आधिकारिक और सबसे सुरक्षित कारों में गिना जाता है।
राष्ट्रपति के काफिले के साथ सुरक्षा और संचार से जुड़े कई दूसरे वाहन भी चलते हैं।
‘फ्लाइंग क्रेमलिन’ से जुड़ी रहती है अतिरिक्त सुरक्षा
पुतिन की विदेश यात्राओं में इस्तेमाल होने वाला विशेष विमान IL-96-300PU भी चर्चा में रहता है। इसे मीडिया रिपोर्ट्स में अक्सर ‘फ्लाइंग क्रेमलिन’ कहा जाता है।
विमान में सुरक्षित संचार प्रणालियों और सरकारी कामकाज के लिए विशेष सुविधाएं होने की बात कही जाती है। हालांकि इसकी पूरी सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्था सार्वजनिक नहीं की गई है।
कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जाता रहा है कि सुरक्षा कारणों से राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान समान दिखने वाले दूसरे विमान भी ऑपरेशन का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन ऐसे इंतजामों की आधिकारिक जानकारी आमतौर पर सार्वजनिक नहीं की जाती।
पुतिन की यात्राओं से जुड़ा ‘वेस्ट सैंपल’ दावा क्या है?
पुतिन की विदेश यात्राओं को लेकर वर्षों से एक असामान्य दावा भी चर्चा में रहा है। कुछ विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि उनकी सुरक्षा टीम यात्रा के दौरान उनके जैविक अपशिष्ट को सुरक्षित तरीके से रूस वापस ले जाती है।
इसके पीछे कथित कारण यह बताया जाता है कि ऐसे नमूनों से किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य से जुड़ी संवेदनशील जानकारी हासिल की जा सकती है।
हालांकि, रूस की ओर से इस तरह की व्यवस्था को लेकर सार्वजनिक रूप से विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए हर गतिविधि अहम
ब्रिक्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन में सुरक्षा एजेंसियों का फोकस केवल राष्ट्राध्यक्षों की सुरक्षा पर नहीं रहता। होटल स्टाफ, वाहन, रूट, ड्रोन, एयरस्पेस, सोशल मीडिया और कार्यक्रम स्थलों से जुड़ी हर गतिविधि की निगरानी की जाती है।
पुतिन और शी जिनपिंग जैसे हाई-प्रोफाइल नेताओं की मौजूदगी के कारण सुरक्षा व्यवस्था और अधिक संवेदनशील हो गई है। यही कारण है कि सम्मेलन के दौरान दिल्ली में जमीन से लेकर आसमान तक सुरक्षा का मजबूत घेरा तैयार किया गया है।

