Yuva India : साल 1940 से भारत के छह राज्यों के बीच फाइलों में उलझी किशाऊ बांध परियोजना को लेकर अच्छी खबर आई है। दरअसल, भारत सरकार ने हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली में जल व बिजली संकट दूर के लिए इन राज्यों का आपस में बड़ा समझौता कराया है।
नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने किशाऊ परियोजना समझौता साइन किए।

क्या है किशाऊ परियोजना ?
इस परियोजना की परिकल्पना अंग्रेजों के समय में सबसे पहले 1940 में की गई थी
1944-45 में तत्कालीन पंजाब सरकार ने इसका सर्वेक्षण कराया
1962 में उत्तर प्रदेश सरकार ने परियोजना की प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की
12 मई 1994 को एक अहम समझौता हुआ, इसके तहत बेसिन में आने वाली प्रत्येक भंडारण परियोजना के लिए अलग-अलग समझौते किए जाएंगे
2019 में लखवार और रेणुकाजी परियोजनाओं के विवाद समाप्त होने के बाद किशाऊ का कार्य आगे बढ़ा
बीते 16 जून को इस पर औपचारिक सहमति बनी
भारत सरकार ने किशाऊ परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया
इसका लगभग 90 प्रतिशत वित्तीय भार भारत सरकार वहन करेगी
शेष 10 प्रतिशत राशि 1994 के समझौते के अनुसार भागीदार राज्यों द्वारा वहन की जाएगी
योजना के तहत उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहने वाली टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी डैम बनेगा, जहां 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर जल संग्रहण होगा। इससे 97 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत भी प्राप्त होगी। इसमें सबसे बड़ा लाभ दिल्ली को होगा।
भारत सरकार का कहना है कि जब यमुना के जल का बंटवारा हुआ, तब नीति-निर्धारकों की ओर से एक गंभीर चूक हुई। यमुना के पर्यावरणीय प्रवाह की गणना ही नहीं की गई और जितना जल उपलब्ध था, वह सब राज्यों के बीच बाँट दिया गया। नदी के लिए जल छोड़ा ही नहीं गया।
किशाऊ परियोजना समझौते से 25 प्रतिशत जल आएगा, वह दिल्ली और यमुना दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। इससे पर्यावरण संरक्षण भी होगा।
सरकार ने यह भी दावा किया है कि इस योजना के जरिए यमुना को शीघ्र स्वच्छ किया जा सकेगा और करोड़ों लोगों को पेयजल, कृषि जल, विकास एवं औद्योगिक उपयोग के लिए जल उपलब्ध हो सकेगा।
केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि जब से श्री नरेन्द्र मोदी जी प्रधानमंत्री बने हैं,
भाजपा सरकार का कहना है कि जब से नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने है, तब से आज तक यह दसवां जल विवाद समाप्त होने जा रहा है। केंद्र सरकार बीते पचास वर्षों से चले आ रहे गंभीर विवादों को समाप्त करने का अभियान चला रही है ।
सबसे पहले अगस्त 2018 में लखवार बहुउद्देशीय परियोजना का विवाद समाप्त हुआ। उसी महीने शाहपुर कंडी बांध परियोजना का विवाद सुलझा।
वर्ष 2019 में ऊपरी यमुना बेसिन की रेणुकाजी बहुउद्देशीय बांध परियोजना का विवाद समाप्त हुआ। वर्ष 2021 में केन-बेतवा लिंक परियोजना पर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच समझौता हुआ, जिससे बुंदेलखंड जैसे जल-संकटग्रस्त क्षेत्र को लाभ मिला।
इनके अलावा हथिनीकुंड से भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से यमुना तक जल अंतरण की योजना फरवरी 2024 में स्वीकृत हुई। नर्मदा परियोजना से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास का विवाद जुलाई 2026 में पूर्ण हुआ। सोन बेसिन में बिहार और झारखंड के बीच जल बंटवारे का विवाद अगस्त 2026 में सुलझा, और आज अंततः किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना पर सहमति बनी।

