Yuva India : जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने सोमवार को केंद्र से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा जल्द देने की मांग वाला प्रस्ताव पारित कर दिया। प्रस्ताव मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पेश किया था। चर्चा के दौरान बीजेपी विधायकों ने विरोध किया और बाद में सदन से वॉकआउट किया।
उमर अब्दुल्ला ने रखा राज्य का दर्जा देने का प्रस्ताव
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 25 सितंबर को विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया था। इसमें केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल देने की मांग की गई। प्रस्ताव में विधानसभा द्वारा वर्ष 2000 और 2024 में पारित पूर्व प्रस्तावों का भी उल्लेख किया गया।
उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में कहा कि राज्य का दर्जा जम्मू-कश्मीर के लोगों का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद राज्य का दर्जा दिए जाने की उम्मीद थी।
प्रस्ताव पर बीजेपी विधायकों ने किया विरोध
प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बीजेपी विधायकों ने सदन के वेल में जाकर विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी की। बीजेपी का कहना था कि वह राज्य के दर्जे की बहाली पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन प्रस्ताव में अनुच्छेद 370 और स्वायत्तता से जुड़े पुराने प्रस्तावों के संदर्भ को स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद बीजेपी विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया।
बीजेपी नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने प्रस्ताव की भाषा पर आपत्ति जताते हुए इसे राज्य के दर्जे के मुद्दे के साथ पुराने विशेष दर्जे और स्वायत्तता से जुड़े विषयों को जोड़ने का प्रयास बताया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया गया हवाला
विधानसभा में चर्चा के दौरान उमर अब्दुल्ला ने दिसंबर 2023 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया, जिसमें जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन और राज्य का दर्जा बहाल करने से जुड़े निर्देशों पर चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद राज्य का दर्जा जल्द से जल्द दिए जाने की बात कही गई थी।
2019 में बदला था जम्मू-कश्मीर का दर्जा
अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों में बदलाव के साथ जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम लागू किया था। इसके तहत तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख नाम के दो केंद्रशासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया गया था।

