Yuva India: संसद की एक स्थायी समिति ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) में भारी संरचनात्मक और प्रक्रियात्मक सुधारों की जोरदार वकालत की है। शिक्षा, महिलाओं, बच्चों, युवाओं और खेल संबंधी संसदीय समिति ने अपनी 382वीं रिपोर्ट—”राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी में सुधार और सुदृढ़ीकरण” (Reforms and Strengthening of the National Testing Agency)—राज्यसभा के सभापति को सौंपी है। समिति का कहना है कि परीक्षा की सुरक्षा मजबूत करने और जनता का भरोसा बहाल करने के लिए क्वेश्चन बैंक (प्रश्न बैंक) में निवेश करना ही भविष्य में पेपर लीक के खिलाफ सबसे कारगर बचाव है।
समिति की मुख्य सिफारिशें:
प्रश्न बैंक (Question Bank) का निर्माण: NTA को एक बड़ा, विविधतापूर्ण और लगातार अपडेट होने वाला क्वेश्चन बैंक तैयार करना चाहिए। विशेषज्ञों द्वारा डिजिटल टूल के माध्यम से परखे गए इन प्रश्नों से बिना किसी पेपर-सेटर की अग्रिम जानकारी के परीक्षा पत्र तैयार किए जा सकेंगे।
परीक्षा के बेहद करीब सेट हो प्रश्नपत्र: अंतिम प्रश्नपत्र परीक्षा से ठीक पहले सेट किए जाने चाहिए, ताकि पेपर लीक के जोखिम को कम किया जा सके। इसके साथ ही, विशेषज्ञों की निगरानी और सख्त गोपनीयता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
विशेषज्ञों की पारदर्शी भर्ती: समिति ने सुझाव दिया है कि NTA को आईआईटी (IITs) और एम्स (AIIMS) जैसे शीर्ष संस्थानों के प्रतिष्ठित और प्रामाणिक विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए तथा हितों के टकराव (Conflict of Interest) से बचने के लिए उनकी पृष्ठभूमि की कड़ी जांच करनी चाहिए।
NEET-UG में कंप्यूटर-आधारित परीक्षण (CBT): समिति ने सुझाव दिया है कि NEET-UG परीक्षा को भी चरणबद्ध तरीके से कंप्यूटर-आधारित मोड पर शिफ्ट किया जाना चाहिए। हालांकि, इसके लिए देश भर के टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण इलाकों के स्कूलों-कॉलेजों में सुरक्षित सरकारी CBT बुनियादी ढांचे का विकास पहले किया जाना चाहिए।
बुनियादी ढांचे के लिए वित्तीय मदद: NTA को खुद आगे आकर देश भर के स्कूलों और कॉलेजों में 100 से 200 नोड्स वाली मध्यम आकार की आईटी लैब स्थापित करने में वित्तीय सहायता प्रदान करनी चाहिए, ताकि प्रत्येक जिले में कम से कम एक परीक्षा केंद्र हो और छात्रों पर यात्रा व आवास का वित्तीय बोझ कम हो सके।
