पंजाब में फर्जी पोर्टल से हो रही वाहनों की RC ट्रांसफर, 25 नंबर संदेह के घेरे में
Yuva India: पंजाब में वाहन मालिकों की जानकारी और वाहनों के रजिस्ट्रेशन से जुड़ी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य के परिवहन विभाग के ऑनलाइन सिस्टम से मिलता-जुलता एक फर्जी पोर्टल बनाकर वाहनों के मालिकाना हक में बदलाव किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि इस पोर्टल के जरिए बिना जरूरी दस्तावेज अपलोड किए और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) की मंजूरी के बिना ही वाहनों की रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) ट्रांसफर की जा रही है।
जालंधर, लुधियाना सहित पंजाब के कई जिलों के कुल 25 वाहन नंबर संदेह के घेरे में हैं। आशंका है कि इन वाहनों के रिकॉर्ड में अनधिकृत तरीके से बदलाव किया गया है। मामला सामने आने के बाद परिवहन विभाग और संबंधित अधिकारियों ने इसकी जांच शुरू करने की बात कही है।
आधार कार्ड अपलोड करने के नाम पर चल रहा खेल
पंजाब परिवहन विभाग के आधिकारिक ऑनलाइन सिस्टम की नकल करते हुए एक फर्जी पोर्टल तैयार किया गया। इसके जरिए वाहन मालिकों की जानकारी और आधार कार्ड अपलोड करने के बाद ऑटो-अप्रूवल मोड पर RC ट्रांसफर की जा रही थी। इस प्रक्रिया में न तो संबंधित RTO अधिकारियों की मंजूरी ली जा रही थी और न ही निर्धारित दस्तावेजों की जांच की जा रही थी।
नियमों के मुताबिक, वाहन का मालिकाना हक बदलने के लिए निर्धारित आवेदन प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। पंजाब परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इसके लिए Form 29 और Form 30 सहित कई दस्तावेजों की आवश्यकता बताई गई है। इनमें मूल RC, वैध बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र, खरीदार के पते का प्रमाण और निर्धारित शुल्क जैसी औपचारिकताएं शामिल हैं।
ऐसे में यदि किसी फर्जी पोर्टल के माध्यम से बिना सत्यापन के वाहन का मालिकाना हक बदला जा रहा है, तो यह न केवल सरकारी रिकॉर्ड की सुरक्षा बल्कि वाहन मालिकों के अधिकारों के लिए भी गंभीर खतरा है।
जालंधर-लुधियाना समेत 25 वाहन नंबरों पर शक
जालंधर और लुधियाना क्षेत्र के कई वाहन नंबर शामिल हैं। इसके अलावा पंजाब के दूसरे जिलों के वाहन नंबर भी संदेह के दायरे में बताए गए हैं। रिपोर्ट में कुल 25 नंबरों का उल्लेख किया गया है।
इन नंबरों की जांच इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वाहन के रिकॉर्ड में गलत तरीके से मालिक का नाम बदलने पर असली मालिक को कानूनी और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। वाहन की बिक्री, चालान, दुर्घटना या किसी आपराधिक गतिविधि की स्थिति में भी रिकॉर्ड में दर्ज गलत जानकारी परेशानी बढ़ा सकती है।
चोरी के वाहनों को खपाने में हो सकता है इस्तेमाल
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि किसी वाहन का मालिकाना रिकॉर्ड बिना उचित सत्यापन के बदल दिया जाता है, तो इसका फायदा वाहन चोरी करने वाले गिरोह उठा सकते हैं। चोरी के वाहन को दूसरे व्यक्ति के नाम पर दर्ज करवाकर उसकी पहचान छिपाने या उसे बेचने की कोशिश की जा सकती है।
इस तरह के मामलों में फर्जी दस्तावेज, गलत पहचान और अनधिकृत ऑनलाइन एक्सेस का इस्तेमाल जांच को मुश्किल बना सकता है। हिमाचल प्रदेश के सोलन में भी VAHAN पोर्टल पर कथित अनधिकृत वाहन पंजीकरण और रिकॉर्ड में बदलाव से जुड़ा मामला सामने आया था। वहां पुलिस जांच में फर्जी यूजर आईडी और दस्तावेजी अनियमितताओं की बात सामने आई थी।
सर्वर और लॉगिन रिकॉर्ड की होगी जांच
मामले की तह तक पहुंचने के लिए सर्वर की जांच कराई जाएगी। इसके तहत यह पता लगाने की कोशिश होगी कि फर्जी पोर्टल किसने तैयार किया, किन लोगों ने इसका इस्तेमाल किया और वाहन रिकॉर्ड में बदलाव के लिए किस तरह की तकनीकी प्रक्रिया अपनाई गई।
सर्वर लॉग, IP एड्रेस और लॉगिन से जुड़ी जानकारी से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि संदिग्ध गतिविधियां कहां से संचालित हुईं। जांच के जरिए यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि सरकारी सिस्टम तक किसी अनधिकृत व्यक्ति की पहुंच बनी थी या फिर आधिकारिक पोर्टल की नकल करके अलग वेबसाइट के माध्यम से लोगों को धोखा दिया गया।
वाहन मालिक क्या सावधानी बरतें?
वाहन मालिकों को सलाह है कि वे अपनी RC और वाहन से जुड़ी जानकारी केवल आधिकारिक परिवहन विभाग या Parivahan पोर्टल पर ही जांचें। किसी अनजान लिंक पर आधार कार्ड, OTP या अन्य निजी जानकारी साझा न करें। वाहन के मालिकाना हक में बदलाव के लिए अधिकृत RTO या निर्धारित सरकारी प्रक्रिया का ही इस्तेमाल करें।
फिलहाल 25 संदिग्ध वाहन नंबरों से जुड़े मामले में जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि कितने वाहनों के रिकॉर्ड में वास्तव में अनधिकृत बदलाव किया गया है और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।
