हाइरॉक्स को मिली वर्ल्ड ट्रायथलॉन की साझेदारी, ओलंपिक तक पहुंचने की राह हुई आसान; अब 3 फॉर्मेट में होंगे मुकाबले
Yuva India: फिटनेस की दुनिया में तेजी से लोकप्रिय हो रहा हाइरॉक्स (HYROX) अब अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वर्ल्ड ट्रायथलॉन और हाइरॉक्स के बीच रणनीतिक साझेदारी हुई है। इस समझौते के तहत रनिंग और फंक्शनल फिटनेस एक्सरसाइज को मिलाकर तैयार किए गए खेल ‘हाइब्रिड रेसिंग’ को वर्ल्ड ट्रायथलॉन के आधिकारिक खेल ढांचे में मान्यता दी जाएगी। इस साझेदारी से हाइरॉक्स के ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों तक पहुंचने की उम्मीद भी बढ़ी है।
दोनों संगठनों ने 28 अक्टूबर 2026 को इस साझेदारी की घोषणा की। इसके तहत हाइरॉक्स एलीट खिलाड़ियों के लिए हाइब्रिड रेसिंग की आधिकारिक वर्ल्ड, कॉन्टिनेंटल और नेशनल चैंपियनशिप आयोजित करने का काम संभालेगा। वहीं, वर्ल्ड ट्रायथलॉन इस खेल के नियमों और प्रतियोगिता व्यवस्था को नियंत्रित करेगा। हालांकि, ओलंपिक या पैरालंपिक में शामिल होने की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह दोनों संगठनों का दीर्घकालिक लक्ष्य है।
2017 में जर्मनी से हुई थी शुरुआत
हाइरॉक्स की शुरुआत साल 2017 में जर्मनी में हुई थी। इसे एक ऐसे इंडोर फिटनेस मुकाबले के रूप में तैयार किया गया, जिसमें केवल दौड़ने की गति ही नहीं, बल्कि ताकत, सहनशक्ति और लगातार प्रदर्शन करने की क्षमता भी परखी जाती है। इस खेल में सामान्य फिटनेस पसंद करने वाले लोगों से लेकर पेशेवर एथलीट तक हिस्सा ले सकते हैं।
इसकी खासियत यह है कि प्रतियोगिता का प्रारूप दुनिया के अलग-अलग देशों में लगभग एक जैसा रहता है। इससे खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करना आसान होता है। समय के साथ हाइरॉक्स ने कई देशों में लोकप्रियता हासिल की है और अब इसे एक संगठित वैश्विक खेल के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी है।
8 किलोमीटर दौड़ और 8 फिटनेस स्टेशन होते हैं
हाइरॉक्स के पारंपरिक मुकाबले में खिलाड़ी को कुल 8 किलोमीटर दौड़ना होता है। इसमें एक-एक किलोमीटर की दौड़ के बाद एक फिटनेस स्टेशन पूरा करना पड़ता है। इस तरह प्रतियोगी को आठ बार दौड़ और आठ अलग-अलग एक्सरसाइज करनी होती हैं।
इन फिटनेस स्टेशनों में स्की एर्ग, स्लेज पुश, स्लेज पुल, बर्पी ब्रॉड जंप, रोइंग, केटलबेल कैरी, सैंडबैग लंज और वॉल बॉल जैसी गतिविधियां शामिल होती हैं। हर स्टेशन पर खिलाड़ी की अलग-अलग शारीरिक क्षमता की परीक्षा होती है। उदाहरण के तौर पर स्लेज पुश और पुल में ताकत की जरूरत होती है, जबकि रोइंग और दौड़ में सहनशक्ति अहम होती है।
अब तीन फॉर्मेट में होंगे मुकाबले
वर्ल्ड ट्रायथलॉन और हाइरॉक्स की साझेदारी के तहत हाइब्रिड रेसिंग को तीन प्रारूपों में विकसित किया जाएगा।
1. अल्टीमेट (Ultimate): यह मौजूदा हाइरॉक्स प्रतियोगिता जैसा होगा। इसमें आठ किलोमीटर दौड़ और आठ फिटनेस स्टेशन शामिल रहेंगे। एलीट खिलाड़ियों की आधिकारिक वर्ल्ड, कॉन्टिनेंटल और नेशनल चैंपियनशिप इसी फॉर्मेट में आयोजित की जाएंगी।
2. फास्ट (Fast): यह कम समय में ज्यादा तीव्रता वाली चुनौती देने वाला प्रारूप होगा। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों को छोटा और तेज मुकाबला उपलब्ध कराना है।
3. अल्ट्रा (Ultra): यह लंबे समय तक प्रदर्शन और सहनशक्ति की परीक्षा लेने वाला प्रारूप होगा। इसमें खिलाड़ियों को ज्यादा अवधि तक अपनी फिटनेस और क्षमता बनाए रखनी होगी।
इन तीनों प्रारूपों के नियम और प्रतियोगिता व्यवस्था वर्ल्ड ट्रायथलॉन और हाइरॉक्स मिलकर विकसित करेंगे। फास्ट और अल्ट्रा के लिए अभी विस्तृत दूरी और एक्सरसाइज संबंधी नियम घोषित नहीं किए गए हैं।
177 से ज्यादा राष्ट्रीय फेडरेशन को मिलेगा फायदा
वर्ल्ड ट्रायथलॉन के नेटवर्क में 177 से अधिक राष्ट्रीय फेडरेशन शामिल हैं। इस साझेदारी के बाद इन फेडरेशन को अपने-अपने देशों में हाइब्रिड रेसिंग प्रतियोगिताएं आयोजित करने का अवसर मिलेगा। वे तीनों फॉर्मेट में मुकाबले करा सकेंगे और एज ग्रुप खिलाड़ियों के लिए राष्ट्रीय चैंपियनशिप भी आयोजित कर पाएंगे।
इससे खेल को केवल पेशेवर एथलीटों तक सीमित रखने के बजाय आम फिटनेस प्रेमियों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। साथ ही अलग-अलग देशों में प्रतियोगिताओं का एक व्यवस्थित ढांचा तैयार होगा।
ओलंपिक और पैरालंपिक तक पहुंचने का लक्ष्य
इस साझेदारी का सबसे अहम उद्देश्य हाइब्रिड रेसिंग को मल्टी-स्पोर्ट्स गेम्स में शामिल कराने की दिशा में काम करना है। इसके बाद दोनों संगठन इसे ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे। हालांकि, इसके लिए अभी कई औपचारिक प्रक्रियाएं और मंजूरियां जरूरी होंगी।
कुल मिलाकर, हाइरॉक्स के लिए यह साझेदारी एक बड़ा कदम मानी जा रही है। इससे उसे अंतरराष्ट्रीय खेल संस्थाओं का समर्थन, राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं का विस्तार और खिलाड़ियों के लिए नए अवसर मिल सकते हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि हाइब्रिड रेसिंग वैश्विक खेल कैलेंडर में अपनी जगह कितनी तेजी से बना पाती है।
