Yuva India: पुरुष जल्दी करते हैं प्यार का इजहार, लेकिन ब्रेकअप के बाद महिलाओं से ज्यादा अंदर से टूट जाते हैं; कमजोर सपोर्ट सिस्टम बनता है मुख्य वजह
मुख्य बातें (Highlights):
रिश्तों का नया सच: आमतौर पर माना जाता है कि महिलाएं ज्यादा भावुक होती हैं और ब्रेकअप के बाद उन्हें ज्यादा तकलीफ होती है, लेकिन नए मनोवैज्ञानिक अध्ययन इसके बिल्कुल उलट चौंकाने वाले खुलासे कर रहे हैं।
प्यार में पहल: विभिन्न देशों में हुए शोध के अनुसार, अक्सर पुरुष ही रिश्तों में सबसे पहले प्यार का इजहार करते हैं।
आत्महत्या का खतरा: ब्रेकअप, अलगाव या तलाक के बाद पुरुषों में आत्महत्या का जोखिम शादीशुदा पुरुषों की तुलना में दोगुना से लेकर 4 गुना तक बढ़ जाता है, जबकि महिलाओं में यह वृद्धि काफी कम होती है।
कमजोर सपोर्ट सिस्टम: पुरुषों के पास दोस्तों और परिवार का मजबूत भावनात्मक सहारा न होना उनके टूटने का सबसे बड़ा कारण बनता है, क्योंकि वे अपनी भावनाएं ज्यादातर सिर्फ अपने पार्टनर से ही साझा करते हैं।
विस्तृत समाचार:
समाज में अक्सर यह धारणा रही है कि रिश्तों के मामलों में महिलाएं अधिक संवेदनशील और भावुक होती हैं, जबकि पुरुष अकेले और आत्मनिर्भर रहकर आसानी से जीवन बिता लेते हैं। लेकिन मनोविज्ञान के हालिया अध्ययन इस पुरानी सोच को खारिज करते हैं। वियना यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता आइरिस वारिंग द्वारा 50 से अधिक अध्ययनों के मेटा-विश्लेषण (Meta-analysis) में यह बात सामने आई है कि प्यार और रिश्तों पर पुरुषों की निर्भरता महिलाओं की तुलना में कहीं अधिक होती है।
सपोर्ट सिस्टम का बिखरना
शोध के मुताबिक, ब्रेकअप या तलाक होने पर पुरुषों का सपोर्ट सिस्टम पूरी तरह बिखर जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पुरुष अपने पार्टनर को ही अपना सबसे बड़ा और एकमात्र भावनात्मक सहारा मान लेते हैं। रिश्ते में असंतोष या पार्टनर के न होने पर वे इस कमी को बहुत ही तीव्रता से महसूस करते हैं। इसके विपरीत, लड़कियां बचपन से ही अपने दोस्तों के साथ खुलकर दिल की बातें साझा करना सीखती हैं, जबकि लड़कों में दोस्तों या परिवार से भावनात्मक समर्थन पाने की आदत थोड़ी कम विकसित होती है।
आंकड़े और अंतरराष्ट्रीय शोध के खुलासे
ब्रिटेन की एबर्ट यूनिवर्सिटी द्वारा 7 अलग-अलग देशों (जैसे अमेरिका, जर्मनी और नीदरलैंड्स) में किए गए अध्ययन में यह बात सामने आई कि लगभग 70% ब्रेकअप या तलाक की पहल महिलाएं करती हैं। रिश्ते टूटने के बाद जहां महिलाएं धीरे-धीरे अपनी जिंदगी की नई शुरुआत कर लेती हैं, वहीं पुरुष गहरे अवसाद (डिप्रेशन), अकेलापन और नशे की गिरफ्त में आ जाते हैं।
मेलबर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता माइकल विल्सन के 2025 के अध्ययन और चीन की वुहान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर यार्फेंग वांग द्वारा 79 लाख लोगों पर किए गए आंकड़ों के विश्लेषण से यह पुष्टि हुई है कि अविवाहित या अकेले रहने वाले पुरुषों में मृत्यु का जोखिम विवाहित पुरुषों की तुलना में 46% अधिक होता है, जबकि महिलाओं के मामले में यह अंतर केवल 22% ही होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जीवनसाथी के दूर होते ही पुरुषों का पूरा भावनात्मक ढांचा ढह जाता है। समाज एक तरफ पुरुषों को अपनी भावनाएं खुलकर न दिखाने और मजबूत बने रहने का दबाव डालता है, वहीं दूसरी traraf यह विरोधाभास उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। इस शोध का निष्कर्ष यही है कि पुरुषों को अपने परिवार और दोस्तों के बीच भी एक स्वस्थ और मजबूत भावनात्मक सपोर्ट सिस्टम बनाकर रखने की सख्त जरूरत है।
