खराब गुणवत्ता के कारण नहीं बिक सका प्याज, सतर्कता समिति ने जांच में की पुष्टि; सरकार ने 26 अक्टूबर तक मांगी रिपोर्ट
Yuva India: देश में प्याज की किल्लत के बीच इसकी कीमतें बढ़कर खुदरा बाजार में 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। दूसरी ओर, महाराष्ट्र के नासिक में सरकारी गोदामों में रखा लाखों क्विंटल प्याज सड़ने का मामला सामने आया है। सरकार ने किसानों और बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से नासिक की लासलगांव मंडी से करीब 12 लाख क्विंटल प्याज 23 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा था। लेकिन उचित भंडारण और गुणवत्ता से जुड़ी समस्याओं के कारण बड़ी मात्रा में प्याज खराब हो गया।
नाफेड और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन (NCCF) जैसी संस्थाओं के माध्यम से खरीदा गया प्याज गोदामों में रखा गया था। इसमें से केवल 2.3 लाख क्विंटल प्याज ही बाजार में बेचा जा सका, जबकि करीब 9.6 लाख क्विंटल प्याज खराब होने की जानकारी सामने आई है।
गोदाम में पानी भरने से खराब हुआ प्याज
नासिक के चांदवड स्थित नाफेड के गोदाम में रखे प्याज की हालत खराब होने का प्रमुख कारण पानी भरना बताया गया है। गोदाम की निचली परत में पानी भर जाने से प्याज काला पड़ गया और सड़ने लगा। स्थिति इतनी खराब हो गई कि अब इस प्याज को खाद बनाने के लिए भी इस्तेमाल करने के उद्देश्य से खरीदार नहीं मिल रहे हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, प्याज की नीलामी के लिए 30 सितंबर, 5 अक्टूबर और 10 अक्टूबर को तीन बार प्रयास किए गए। इसके बावजूद एक रुपये प्रति किलो की कीमत पर भी खरीदार नहीं मिले। इससे प्याज के भंडारण, रखरखाव और खरीद प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
23 रुपये किलो खरीदा गया था प्याज
देश में प्याज की आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकारी एजेंसियां किसानों से प्याज खरीदती हैं। इस मामले में भी नासिक की लासलगांव मंडी से करीब 12 लाख क्विंटल प्याज खरीदा गया था। इसका उद्देश्य बाजार में उपलब्धता बढ़ाना और जरूरत पड़ने पर उपभोक्ताओं को राहत देना था।
हालांकि, गोदामों में प्याज खराब होने के कारण सरकारी खरीद का बड़ा हिस्सा उपयोग में नहीं आ सका। करीब 12 लाख क्विंटल में से 2.3 लाख क्विंटल ही बेचा जा सका, जबकि लगभग 9.6 लाख क्विंटल प्याज खराब हो गया। इससे सरकारी खरीद और भंडारण व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं।
सतर्कता समिति ने जांच में पाई गड़बड़ी
प्याज खरीद में कथित गड़बड़ी और खराब गुणवत्ता की जांच के लिए गठित सरकारी सतर्कता समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में खराब प्याज खरीदे जाने और उसके सड़ने की पुष्टि की है। इसके बाद सरकार ने नासिक के जिलाधिकारी को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति को सभी खरीद केंद्रों और गोदामों का निरीक्षण करके विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। अधिकारियों को 26 अक्टूबर तक रिपोर्ट सौंपनी है। जांच में खरीद की गुणवत्ता, भंडारण की स्थिति और प्याज खराब होने के कारणों की पड़ताल की जाएगी।
अब खाद बनाने के लिए बेचने की कोशिश
NCCF के करीब 12 हजार मीट्रिक टन प्याज को बाजार तक पहुंचाया जा सका। नासिक शाखा के प्रबंधक के अनुसार, खराब प्याज को अब खाद बनाने के लिए बेचने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए दो से चार रुपये प्रति किलो तक मिलने की उम्मीद जताई गई है, हालांकि इतनी कम कीमत पर बिक्री होने से भी नुकसान की भरपाई मुश्किल मानी जा रही है।
प्याज की कीमतों के बीच उठे सवाल
एक तरफ देश के कई हिस्सों में प्याज की कीमतें बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकारी गोदामों में बड़ी मात्रा में प्याज खराब होने की खबर सामने आई है। ऐसे में खरीद, भंडारण और वितरण व्यवस्था को लेकर जवाबदेही तय करना महत्वपूर्ण हो गया है।
अब जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि प्याज की गुणवत्ता खराब होने और गोदामों में सड़ने के पीछे क्या कारण रहे। साथ ही, यह भी पता चलेगा कि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए भंडारण व्यवस्था में क्या सुधार किए जा सकते हैं।
