सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त फैक्ट-फाइंडिंग आयोग की रिपोर्ट में नामांकन पत्र छीनने, उम्मीदवारों को रोकने, धमकाने और बूथ कैप्चरिंग जैसी कथित अनियमितताओं का उल्लेख
Yuva India: पंजाब में दिसंबर 2024 में हुए स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एक सदस्यीय फैक्ट-फाइंडिंग आयोग ने अपनी रिपोर्ट में चुनाव प्रक्रिया के दौरान कई कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया है। कुछ स्थानों पर उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने, नामांकन पत्र छीनने, पुलिस की मौजूदगी में दस्तावेज फाड़ने, धमकाने और फर्जी मतदान जैसी घटनाएं सामने आईं।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति निर्मलजीत कौर को इन आरोपों की जांच का जिम्मा सौंपा गया था। आयोग ने उपलब्ध वीडियो फुटेज, तस्वीरों, मीडिया रिपोर्टों और संबंधित अधिकारियों के रिकॉर्ड की समीक्षा की।
50 वार्डों में चुनावी अनियमितताओं का उल्लेख
रिपोर्ट में पटियाला जिले के 28 और मोगा जिले के 22 वार्डों में चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। आयोग ने इन वार्डों में चुनाव रद्द कर नए सिरे से मतदान कराने की सिफारिश की। रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को आयोग की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया था।
नामांकन पत्र छीनने और उम्मीदवारों को रोकने के आरोप
रिपोर्ट में कहा गया है कि पटियाला नगर निगम के कई वार्डों में नामांकन प्रक्रिया के दौरान हिंसा, दस्तावेज छीनने और उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने की घटनाओं के साक्ष्य मिले। एक वीडियो में कांग्रेस उम्मीदवार शारदा देवी अपने दस्तावेज छीन लिए जाने के बाद रोती हुई दिखाई दीं।
एक अन्य मामले में भाजपा उम्मीदवार विजय कुमार गर्ग के नामांकन पत्र कथित तौर पर रिटर्निंग अधिकारी के कार्यालय के बाहर छीन लिए गए। रिपोर्ट में पुलिस की मौजूदगी में हुई इस घटना का भी उल्लेख किया गया है।
आयोग ने कहा कि वीडियो और तस्वीरों सहित उपलब्ध साक्ष्य नामांकन प्रक्रिया के दौरान हुई अव्यवस्था और हिंसा की गंभीरता को दर्शाते हैं।
CCTV फुटेज सुरक्षित रखने में लापरवाही
रिपोर्ट में नामांकन दाखिल करने वाले दिन मिनी सचिवालय परिसर और पुलिस थानों की CCTV रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने में कथित लापरवाही पर भी सवाल उठाए गए हैं। आयोग के अनुसार, संबंधित फुटेज को सुरक्षित रखने की आवश्यकता थी, ताकि घटनाओं की निष्पक्ष जांच हो सके।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि उन्हें नामांकन दाखिल करने से रोका गया, जबकि कुछ मामलों में नामांकन पत्रों को खारिज किए जाने पर सवाल उठे।
पटियाला और मोगा के मामलों का उल्लेख
पटियाला के वार्ड 48 में कांग्रेस उम्मीदवार सुरिंदर सिंह सच्चदेवा ने आरोप लगाया कि उनके नामांकन पत्रों को गलत तरीके से खारिज किया गया, जिससे आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार राजेश कुमार निर्विरोध निर्वाचित हो गए।
मोगा जिले की धर्मकोट नगर परिषद के कई वार्डों में भी नामांकन प्रक्रिया को लेकर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मामलों में उम्मीदवारों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिली और नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया प्रभावित हुई।
चुनावी पारदर्शिता पर उठे सवाल
आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया इस तरह संचालित की गई कि कुछ स्थानों पर केवल एक पार्टी के उम्मीदवार ही नामांकन दाखिल कर सके। रिपोर्ट ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता, उम्मीदवारों की सुरक्षा और CCTV रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
यह रिपोर्ट पंजाब में स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया और चुनावी पारदर्शिता को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाती है। हालांकि, रिपोर्ट में उल्लिखित घटनाओं को आयोग के निष्कर्षों और आरोपों के संदर्भ में ही समझा जाना चाहिए।
